पुतुल कुमारी ने बताया कि शुरुआत में उनके पास ज्यादा जमीन नहीं थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने जैविक खेती से जुड़ा प्रशिक्षण लिया और इसके बाद बहुस्तरीय खेती का प्रयोग शुरू किया. इस पद्धति में एक ही खेत में एक साथ कई तरह की फसलें उगाई जाती हैं
पुतुल कुमारी ने बताया कि शुरुआत में उनके पास ज्यादा जमीन नहीं थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने जैविक खेती से जुड़ा प्रशिक्षण लिया और इसके बाद बहुस्तरीय खेती का प्रयोग शुरू किया. इस पद्धति में एक ही खेत में एक साथ कई तरह की फसलें उगाई जाती हैं, जिससे जमीन का बेहतर उपयोग होता है और आमदनी भी बढ़ती है.
पुतुल कुमारी ने कहा कि वह रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करती हैं. उनकी खेती पूरी तरह जैविक है. खेतों में देसी गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैविक कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है. फसलों को कीटों और रोगों से बचाने के लिए प्राकृतिक उपाय अपनाए जाते हैं, जिससे उत्पादन बेहतर होता है और लागत भी कम रहती है.
वर्तमान में पुतुल कुमारी अपने खेत में एक साथ बैंगन, आलू, मिर्च और फूलगोभी की खेती कर रही हैं. अलग-अलग समय पर फसलों की कटाई होने से उन्हें हर महीने नियमित आय मिलती रहती है. बाजार में जैविक सब्जियों की अच्छी मांग होने के कारण उन्हें बेहतर दाम भी मिलते हैं.
पुतुल कुमारी का कहना है कि जैविक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है. उन्होंने अन्य किसानों, खासकर महिलाओं और युवाओं से अपील की है कि वे जैविक और बहुस्तरीय खेती को अपनाएं. कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने का यह एक बेहतर विकल्प है. आज उनकी सफलता को देखकर आसपास के कई किसान उनसे प्रेरणा ले रहे हैं. गोड्डा जिले की यह बेटी आत्मनिर्भर भारत की एक सशक्त मिसाल बन चुकी है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
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