मुरारी पांडे का कहना है कि यह गलत बिल बिजली विभाग के ऊर्जा मित्र द्वारा बनाया गया है. उन्होंने कई बार विभाग में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई. बार-बार अनदेखी और समाधान न मिलने के कारण उन्हें यह कठोर कदम उठाना पड़ा.
मामला महागामा अनुमंडल एसडीओ कोर्ट में कार्यरत अधिवक्ता मुरारी पांडे से जुड़ा है. वे बिजली विभाग की कथित लापरवाही से आहत होकर पिछले 48 घंटों से भूखे-प्यासे अनशन पर बैठे हैं. अधिवक्ता का आरोप है कि उनके घर में बिजली की खपत बेहद कम है. उन्होंने बताया कि घर में केवल तीन बल्ब और दो पंखे हैं, वह भी ठंड के मौसम में लगभग बंद ही रहते हैं. इसके बावजूद बिजली विभाग ने 47 दिनों का 4502 रुपये का बिल थमा दिया, जो वास्तविक खपत से कहीं अधिक है.
मुरारी पांडे का कहना है कि यह गलत बिल बिजली विभाग के ऊर्जा मित्र द्वारा बनाया गया है. उन्होंने कई बार विभाग में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई. बार-बार अनदेखी और समाधान न मिलने के कारण उन्हें यह कठोर कदम उठाना पड़ा.
उन्होंने कहा कि वे पेशे से अधिवक्ता जरूर हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अदालत में मुकदमा भी नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में न्याय पाने का एकमात्र रास्ता उन्हें आमरण अनशन ही नजर आया. इसी कारण वे बिजली विभाग के कार्यालय परिसर में धरने पर बैठे हैं.
इस अनशन की खबर फैलते ही इलाके में चर्चा तेज हो गई है. स्थानीय लोग और अन्य अधिवक्ता भी नाराजगी जता रहे हैं. उनका कहना है कि जब एक वकील को अपनी बात रखने के लिए इस हद तक जाना पड़ रहा है, तो आम उपभोक्ताओं की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है.
वहीं, बिजली विभाग के एडीओ कंचन टुडू ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है. यदि बिल में गड़बड़ी पाई जाती है तो उसे जल्द ठीक किया जाएगा. फिलहाल विभागीय जांच जारी है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
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