गोवा अब जेन-Z और मिलेनियल्स का रहने के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार गोवा में घर खरीदना अब सिर्फ एक निवेश मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह एक एस्पिरेशनल लाइफस्टाइल चॉइस बन चुका है. भारतीय और पुर्तगाली संस्कृति का अनोखा मेल, शांत वातावरण और रिलैक्स्ड जीवनशैली इसे दूसरे बड़े शहरों से अलग पहचान दे रही है. सबसे खास बात है कि आयुर्वेद, यूनानी आदि वेलनेस पद्धतियों की तर्ज पर यहां लाइफस्टाइल विकसित हो रही है, जो फ्यूचर की जीवनशैली बनने जा रही है.
कीमतों में 66 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़त
मैजिकब्रिक्स के आंकड़े बताते हैं कि गोवा देश के सबसे तेजी से उभरते रियल एस्टेट हॉटस्पॉट्स में शामिल हो चुका है. राज्य में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतों में साल-दर-साल लगभग 66 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. नॉर्थ गोवा के पोरवोरिम और थिविम जैसे इलाकों में कीमतों में तेज उछाल देखा गया है, जबकि लग्जरी विला और हॉलिडे होम्स की मांग लगातार बढ़ती जा रही है.
जीएचडी ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भरत ठाकरान कहते हैं कि 2012 से यह ग्रुप गोवा में प्रीमियम लिविंग स्पेसेज बना रहा है. प्रदूषण, ट्रैफिक और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर से जूझ रहे मेट्रो शहरों के मुकाबले गोवा साफ हवा, प्राकृतिक सुंदरता और सुकून भरी जीवनशैली का दुर्लभ संयोजन पेश करता है. आज जहां अमीर खरीदार लग्जरी को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं युवा और टेक-सेवी प्रोफेशनल्स ग्लोबल स्टैंडर्ड वाले घरों की तलाश में यहां आ रहे हैं.

गोवा की सबसे खूबसूरत चीज यहां की ताजा और शुद्ध हवा के साथ ही पुर्तगाली कल्चर का समावेश भी है.
उनका मानना है कि डिजिटल-फर्स्ट वर्क कल्चर और रिमोट वर्क के बढ़ते चलन ने घर की परिभाषा ही बदल दी है. सीमित जमीन, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सख्त सरकारी नियम और लगातार बढ़ती कीमतें गोवा के रियल एस्टेट को एक्सक्लूसिव और फ्यूचर-रेडी बना रही हैं. बीते दो वर्षों में लग्जरी और सेकेंड होम खरीदारों की संख्या में तेज इजाफा देखा गया है, जो एक मज़बूत और स्थिर बाजार की ओर इशारा करता है.
कोस्टल अपार्टमेंट्स जहां 30–40 वर्ष की उम्र के युवा खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं, वहीं गोवा के रियल एस्टेट मार्केट में 15 करोड़ रुपये से ऊपर के लग्जरी विला की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है. कोविड के बाद वर्क फ्रॉम होम के बढ़ते चलन ने बड़े, प्राइवेट और नेचर-कनेक्टेड स्पेसेज की डिमांड को और तेज कर दिया है. नॉर्थ गोवा के अर्जुना, अरपोरा, वागाटोर और कैंडोलिम जैसे इलाकों में लग्जरी विला सेगमेंट में लगातार ग्रोथ दर्ज की जा रही है. सेकंड होम का कॉन्सेप्ट अब केवल वेकेशन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रेंटल इनकम और लॉन्ग-टर्म कैपिटल एप्रिसिएशन का अहम जरिया बन चुका है.
वहीं राजेश जैन, डायरेक्टर, कॉन्सिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि के अनुसार, ‘अस्सागाओ आज गोवा के सबसे पसंदीदा रेजिडेंशियल इलाकों में शामिल हो चुका है. हरियाली, ओल्ड-वर्ल्ड चार्म और शांत माहौल इसे परिवारों, निवेशकों और सेकंड होम खरीदारों के लिए आदर्श बना दिया है. उनका मानना है कि अब लोग रियल एस्टेट को सिर्फ जरूरत के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी पहचान और जीवनशैली के हिस्से के रूप में देखने लगे हैं, और गोवा इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है.’

गोवा में विला और फ्लैटों की कीमत दिल्ली-एनसीआर के बराबर ही पहुंच गई है.
गोवा के रियल एस्टेट बूम को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से भी मजबूत समर्थन मिल रहा है. मनोहर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (GOX) के शुरू होने से राज्य की एयर कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार हुआ है, जिससे निवेशकों का भरोसा और बढ़ा है. इसके साथ ही PPP मॉडल के तहत सरकारी पहलें और NAREDCO महाराष्ट्र की भागीदारी से रेजिडेंशियल, कमर्शियल और मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट के नए अवसर खुल रहे हैं. मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी भी गोवा को सेकंड होम के लिए और अधिक आकर्षक बना रही है.
कुल मिलाकर, गोवा का रियल एस्टेट बूम कोई अस्थायी ट्रेंड नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक बदलाव है. लग्जरी विला, कोस्टल अपार्टमेंट्स और गेटेड कम्युनिटीज गोवा को भारत के सबसे पसंदीदा प्रीमियम रियल एस्टेट डेस्टिनेशन्स में शामिल कर रहे हैं.आज गोवा में घर खरीदना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि बेहतर जीवनशैली, स्थिर रिटर्न और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक बन चुका है.
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