सभा को संबोधित करते हुए मालवीया ने कहा कि भाजपा छोड़ने के बाद रात करीब 12 बजे चार गाड़ियां उनके घर पहुंचीं और तलाशी ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल पंप और बेटे के क्रेशर प्लांट पर भी जांच की गई। जेल भेजने की बातें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने उनका पूरा सहयोग किया है और जरूरत पड़ी तो सड़कों पर उतरेंगे। मालवीया ने सवाल उठाया कि एसीबी और सरकार ने उनके घर लोगों को क्यों भेजा। उनका उद्देश्य उन्हें और उनकी पार्टी को बदनाम करना था। उन्होंने सरकार से अपील की कि तीन स्थानों पर की गई जांच में क्या मिला, यह सार्वजनिक किया जाए।
मजबूरी में ज्वाइन की थी भाजपा
मालवीया ने कहा कि वर्ष 2023 में विधायक बनने के बाद उन पर भाजपा में शामिल होने का दबाव बनाया गया। मजबूरी में उन्हें भाजपा ज्वाइन करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि बजट में क्षेत्र को विशेष लाभ मिलेगा, लेकिन दो बजट बीतने के बाद भी कोई घोषणा पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय तक इंतजार करते रहे कि बागीदौरा को कुछ मिलेगा, लेकिन कुछ भी नहीं मिला। मालवीया ने कहा कि 40 वर्षों की राजनीति में उन्हें राजनीति सिखाने की जरूरत नहीं है। वे गांव से हैं, लेकिन पढ़े-लिखे हैं। मंत्री रहते हुए जिन कार्यों के लिए बजट स्वीकृत हुआ था, वे आज भी चल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार उन कार्यों को बंद करेगी, तो वे गांव-गांव जाकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा बजट कांग्रेस की पूर्ववर्ती गहलोत सरकार की देन है।
अशोक गहलोत को भेजा संदेश
मालवीया ने बताया कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को संदेश भेजा—“नमस्ते, चरण स्पर्श।” इसके बाद कांग्रेस आलाकमान से बातचीत हुई और उन्हें कांग्रेस में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई। उन्होंने कहा कि सभी वरिष्ठ नेताओं का आशीर्वाद उन्हें मिला है और तीन साल बाद कांग्रेस की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि वे जीवन के शेष समय में कांग्रेस के लिए काम करेंगे। मालवीया ने यह भी कहा कि विकास और विरोध एक साथ नहीं चल सकते। जो लोग नई पार्टी बनाकर आए हैं, वे कैसे काम कर पाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार रिश्वत के दोषी विधायकों को संरक्षण दे रही है।
मनरेगा को लेकर मानगढ़ में जुटेंगे लाखों लोग
मालवीया ने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार में मनरेगा को लगभग बंद कर दिया गया है। मेटों और सामग्री का भुगतान रोका गया है और योजना से महात्मा गांधी का नाम तक हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि वे दिल्ली जाकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रण दे चुके हैं और मनरेगा के मुद्दे पर मानगढ़ में राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के लाखों लोगों को एकत्र करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे केंद्र सरकार की नींद उड़ जाएगी।
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सरकार की मंशा पर उठे सवाल
इस मौके पर बेणेश्वर धाम के पीठाधीश महंत अच्युतानंद महाराज ने कहा कि पूरे घटनाक्रम से सरकार की मंशा पर संदेह पैदा होता है। उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासियों को प्रकृति पूजक, भगवान के भक्त और मूल निवासी मानती है, लेकिन एक स्वाभिमानी आदिवासी नेता पर रातोंरात कार्रवाई करना उचित नहीं लगता। उन्होंने कहा कि महेंद्रजीत सिंह मालवीया को गुलामी और जी-हुजूरी पसंद नहीं है। गलतियां इंसान से होती हैं, लेकिन इस तरह की त्वरित कार्रवाई से आघात पहुंचा है और यह बदले की भावना जैसा प्रतीत होता है।
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