किसान प्रियरंजन सिंह ने कहा कि पिपरमेंट की खेती नीलगाय से सुरक्षित है. नीलगाय इस फसल को नुकसान नहीं पहुंचाती. पिपरमेंट की खुशबू और स्वाद के कारण जानवर इससे दूर रहते हैं.
हुसैनाबाद के किसान प्रियरंजन सिंह पहले आलू और सब्जियों की खेती करते थे. यह खेती मुनाफे वाली जरूर थी, लेकिन नीलगाय आए दिन फसलों को नुकसान पहुंचा देती थी. वहीं ये फसल 90 दिनों में तैयार हो जाता है. इससे उनकी मेहनत और लागत दोनों बर्बाद हो जाती थीं. नीलगाय की समस्या से परेशान होकर उन्होंने खेती का तरीका बदलने का निर्णय लिया. प्रियरंजन सिंह ने यूट्यूब के माध्यम से जानकारी हासिल कर पिपरमेंट (पुदीना तेल) की खेती शुरू की.
नीलगाय नहीं पहुंचाती है पिपरमेंट फसलों को नुकसान
किसान प्रियरंजन सिंह बताते हैं कि पिपरमेंट की खेती नीलगाय से सुरक्षित है. नीलगाय इस फसल को नुकसान नहीं पहुंचाती. पिपरमेंट की खुशबू और स्वाद के कारण जानवर इससे दूर रहते हैं. उनकी फसल अब पूरी तरह सुरक्षित रहती है. साथ ही यह खेती आर्थिक रूप से भी काफी फायदेमंद साबित हो रही है. पिपरमेंट से निकलने वाला तेल बाजार में हाई वैल्यू पर बिकता है. वर्तमान समय में पिपरमेंट का तेल करीब 1500 रुपये प्रति लीटर के भाव से बिक रहा है. सही तरीके से खेती करने पर एक सीजन में अच्छी मात्रा में तेल निकलता है, जिससे किसान लाखों रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. पहले जहां उन्हें नीलगाय के कारण नुकसान का सामना करना पड़ता था, वहीं अब उन्हें स्थायी और सुरक्षित आमदनी का जरिया मिल गया है.
किसानों करें व्यावसायिक खेती
प्रियरंजन सिंह का कहना है कि अगर पलामू जिले के किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ पिपरमेंट जैसी वैकल्पिक और व्यावसायिक खेती अपनाएं, तो नीलगाय की समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है. साथ ही किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी.नीलगाय से परेशान पलामू के किसानों के लिए यह पहल एक नई राह दिखा रही है. कृषि विभाग और प्रशासन ऐसे किसानों को प्रोत्साहित करे, ताकि अधिक से अधिक किसान इस तरह की लाभकारी खेती अपनाकर नुकसान से बच सकें और आत्मनिर्भर बन सकें.
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