Haryana News: फरुखनगर या सोना के रास्ते फास्ट्रैक से सामान्य किराया 60 से 90 रुपये है, जबकि हाईवे पर सीधे कुंडली से पलवल तक का टैक्स वाहन चालकों से 240 रुपये लिया जा रहा है. अब लोग सवाल खड़े कर रहे हैं कि आखिर उनसे अवैध वसूली क्यों की जा रही है.
सूत्रों के मुताबिक, मानेसर, फरुखनगर या सोना के रास्ते फास्ट्रैक से सामान्य किराया 60 से 90 रुपये है, जबकि हाईवे पर सीधे कुंडली से पलवल तक का टैक्स वाहन चालकों से 240 रुपये लिया जा रहा है. अगर औसतन 180 रुपये प्रति वाहन की दर से हिसाब किया जाए तो महीने में करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है.
क्यों दोगुना और तीन गुना पैसा वसूल?
हालांकि इसके लिए बाकायदा नेशनल हाईवे ने गाइडलाइन भी जारी की हुई है, जिसके तहत लोगों को पैसा वापस करने के लिए बकायदा एप्लीकेशन के माध्यम से कंप्लेंट डालनी पड़ती है, लेकिन जब भारी भरकम टोल टैक्स वाहन चालकों से लिया जा रहा है तो आखिरकार क्यों दोगुना और तीन गुना पैसा वाहन चालकों के फास्ट्रेक से कटता है. इसके लिए आखिरकार कौन जिम्मेदार है और इस सारे गोरख धंधे के पीछे किसका हाथ है.
एग्जिट प्वाइंट पर अवैध वसूली
आपको बता दें कि यह गोरख धंधा इस कुंडली मानेसर हाईवे पर पिछले लंबे समय से चलता आ रहा है, क्योंकि अमूमन देखा जाता है कुंडली से सोहना तक जितने भी एंट्री पॉइंट हैं, वहां पर कंपनी की तरफ से ना तो कोई पुख्ता स्कैनर लगाए गए हैं और ना ही कोई मैन्युअल रसीद काटने के लिए मैनपॉवर बढ़ाई गई है. देखा जाता है कि सीधे एंट्री पॉइंट से वह एंट्री करते हैं और एग्जिट प्वाइंट पर उनसे अवैध वसूली की जाती है.
अब इसमें बहुत से लोग तो इस ओर ध्यान देते ही नहीं, लेकिन यदि ध्यान दिया जाए तो हजारों आदमी में से सिर्फ कुछ लोगों के ही पैसे रिफंड होते हैं, बाकी पैसा कहां और किसके खाते में जाता है, इसका कोई लेखा-जोखा टोल कर्मियों के पास भी नहीं होता है. वाहन चालकों का सवाल है कि आखिर इस अवैध वसूली के पीछे कौन जिम्मेदार है और इतने लंबे समय तक यह घोटाला कैसे चलता रहा.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
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