Doongarpur News : डूंगरपुर में दिशा बैठक के दौरान भाजपा सांसद मन्नालाल रावत और बीएपी सांसद राजकुमार रोत के बीच तीखी बहस और धमकी से माहौल तनावपूर्ण हो गया, सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति संभाली. बैठक की कार्यवाही के दौरान पैदा हुए इस तनावपूर्ण माहौल ने न सिर्फ प्रशासन को असहज किया, बल्कि वहां मौजूद अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी हैरान नजर आए.
बैठक की कार्यवाही के दौरान पैदा हुए इस तनावपूर्ण माहौल ने न सिर्फ प्रशासन को असहज किया, बल्कि वहां मौजूद अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी हैरान नजर आए. करीब 15 मिनट तक चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश से किसी तरह स्थिति को संभाला जा सका और फिर बैठक की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई.
एजेंडे को लेकर शुरू हुई बहस
जानकारी के अनुसार दिशा बैठक की शुरुआत में ही बीएपी सांसद राजकुमार रोत ने एजेंडे से हटकर राज्य सरकार से जुड़े मुद्दे उठाने शुरू कर दिए. इस पर भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने आपत्ति जताते हुए कहा कि दिशा की बैठक केंद्र सरकार की योजनाओं और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए होती है और चर्चा एजेंडे के अनुसार ही होनी चाहिए. इसी बात को लेकर दोनों सांसदों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई.
बीएपी सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि बैठक के अध्यक्ष होने के नाते उन्हें यह अधिकार है कि वे जनता से जुड़े हर मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं. उनका कहना था कि क्षेत्र की समस्याएं चाहे केंद्र से जुड़ी हों या राज्य से, उन पर बात करना जरूरी है. इसी दौरान राजकुमार रोत ने मन्नालाल रावत पर आरोप लगाया कि वे केवल माहौल खराब करने आए हैं और डूंगरपुर के विकास में उनकी कोई रुचि नहीं है.
तू तू मैं मैं और धमकी तक पहुंचा मामला
बहस उस वक्त और उग्र हो गई जब भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने खुद को धमकाया जाने वाला निर्वाचित जनप्रतिनिधि बताया. इसी बीच आसपुर से बीएपी विधायक उमेश डामोर भी चर्चा में कूद पड़े. विधायक डामोर और सांसद रावत के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई और बातचीत पूरी तरह तू तू मैं मैं में बदल गई.
माहौल उस समय और बिगड़ गया जब विधायक उमेश डामोर ने सांसद मन्नालाल रावत को खुले तौर पर धमकी देते हुए कहा कि अगर लड़ाई करनी है तो बाहर आ जाना. इस बयान के बाद सदन में हड़कंप मच गया और बैठक की व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई.
सुरक्षाकर्मियों ने संभाला मोर्चा
स्थिति बिगड़ती देख सुरक्षाकर्मियों को तत्काल आगे आना पड़ा और दोनों पक्षों को अलग किया गया. करीब 15 मिनट तक चली इस तनातनी के कारण बैठक की कार्यवाही बाधित रही. मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य सदस्यों ने दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया. काफी मशक्कत के बाद मामला शांत हुआ और फिर बैठक को दोबारा शुरू किया जा सका.
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिला स्तर की इस महत्वपूर्ण बैठक में हुए हंगामे की चर्चा जिले से लेकर प्रदेश की राजनीति तक होने लगी है. दिशा जैसी समीक्षा बैठक में जनप्रतिनिधियों के इस तरह आमने सामने आने और धमकी तक बात पहुंचने से राजनीतिक शिष्टाचार और प्रशासनिक बैठकों की गरिमा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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