ग्रामीणों का कहना है कि आसोतरा में पानी की दिक्कत कोई नई बात नहीं है। बीते कई महीनों से जलापूर्ति ठीक नहीं है। कई मोहल्लों में हफ्ते में सिर्फ एक-दो बार ही पानी आता है, वह भी बहुत कम दबाव के साथ। कई घरों में महिलाओं और बुजुर्गों को दूर-दूर से पानी भरकर लाना पड़ रहा है। पशुपालकों को भी भारी परेशानी हो रही है। लोगों के मुताबिक, पानी की कमी से घर का कामकाज ही नहीं, बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की दिनचर्या भी बिगड़ गई है। ग्रामीण कई बार संबंधित विभाग में शिकायत कर चुके हैं। पंचायत स्तर पर भी बात रखी गई, विधायक और जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया, लेकिन हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
10 फरवरी की समयसीमा भी बेअसर
ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें 10 फरवरी तक समस्या दूर करने का भरोसा दिया गया था। अधिकारियों ने पाइपलाइन ठीक करने, मोटर बदलने और जरूरत पड़ने पर टैंकर भेजने की बात कही थी। लेकिन तय समय निकल जाने के बाद भी जमीन पर कोई ठोस काम नजर नहीं आया। इसी नाराजगी में बुजुर्ग ने यह कदम उठाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बुजुर्ग सुबह अचानक पानी की टंकी पर चढ़ गए और कहा कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होगा, वे नीचे नहीं उतरेंगे। नीचे खड़े ग्रामीणों ने उनका समर्थन किया और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए।
प्रशासन और पुलिस मौके पर
घटना की खबर मिलते ही प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंच गई। पहले हालात को संभाला गया, फिर ग्रामीणों से बातचीत शुरू हुई। करीब तीन घंटे तक समझाइश और बातचीत चलती रही। अधिकारियों ने बुजुर्ग को सुरक्षा का भरोसा दिया और समस्या के समाधान को लेकर लिखित में सहमति देने की बात कही। काफी कोशिश के बाद बुजुर्ग को सुरक्षित नीचे उतारा गया। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें टंकी से उतारकर सुरक्षित जगह पर ले जाया गया। एहतियात के तौर पर टंकी के आसपास सुरक्षा घेरा भी बनाया गया था।
लिखित सहमति के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन
बातचीत के बाद प्रशासन और ग्रामीणों के बीच पेयजल समस्या के समाधान को लेकर लिखित सहमति बनी। अधिकारियों ने जल्द पाइपलाइन सुधारने, नियमित पानी देने और वैकल्पिक व्यवस्था करने का भरोसा दिया। लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन खत्म कर दिया। हालांकि ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर तय समय में काम नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। लोगों का कहना है कि अब केवल बातें नहीं, काम चाहिए।
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