Dodka Cultivation In Winter: सरगुजा जिले के लिए डोडका एक लाभदायक फसल बनकर उभर रही है, लेकिन इसके लिए किसानों को वैज्ञानिक तरीकों और विशेषज्ञों की सलाह पर अमल करना आवश्यक है. कृषि विशेषज्ञों ने इसकी खेती के लिए कई प्रभावी टिप्स बताए हैं. आइए देखते हैं ये रिपोर्ट…
भूमि तैयारी उपज का पहला और सबसे जरूरी चरण
कृषि एक्सपर्ट गंगा राम ने लोकल 18 को बताया कि डोड़का लता वर्गीय सब्जी है, जिसकी फूटिंग सीधे तौर पर लता के फैलाव पर निर्भर करती है. इसलिए खेती शुरू करने से पहले खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाना बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि यदि ड्रिप सिंचाई उपलब्ध न हो तो गर्मी के मौसम में थाला प्रणाली सबसे उपयुक्त रहती है. थाला बनाकर उसमें एनपीके, सड़ी हुई गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाकर बीज बोने से पौधों की शुरुआती ग्रोथ मजबूत होती है.
ठंडी में सीडलिंग तैयार करना आसान
कृषि एक्सपर्ट ने बताया कि सर्दियों के मौसम में बीज का देर से अंकुरण किसानों को परेशान करता है. ऐसे में अंबिकापुर उद्यान केंद्र की प्लग टाइप सीडलिंग यूनिट किसानों के लिए मददगार साबित हो रही है. एक्सपर्ट ने बताया कि यहां तापमान नियंत्रित मशीनों में बीज देकर आसानी से पौधे तैयार करवाए जा सकते हैं. बीज देने के लगभग एक महीने बाद पौधे पूरी तरह तैयार मिल जाते हैं और इसका रखरखाव शुल्क केवल ₹1 प्रति पौधा रखा गया है.
उन्नत वैरायटी वानी बनी किसान की पहली पसंद
गंगा राम के मुताबिक, डोड़का की उन्नत उत्पादक वैरायटी की बात करें तो पिंकरोक कंपनी की ‘वानी’ किस्म को किसान बड़ी संख्या में अपना रहे हैं. यह किस्म अधिक उत्पादन और बेहतर क्वालिटी के लिए जानी जाती है.
तीनों मौसम में संभव खेती
गंगा राम ने बताया कि डोड़का की खेती खरीफ, रबी और ग्रीष्मतीनों मौसमों में की जा सकती है. आजकल मार्केट में उपलब्ध हाईब्रिड बीजों की वजह से किसान इसकी खेती 12 महीने तक कर पा रहे हैं. ऑफ-सीजन में डोड़का की बाजार कीमत अधिक होने से किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं.
कीट और रोग प्रबंधन
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार लता फैलने के समय कई प्रकार के सकिंग कीट पत्तियों को नुकसान पहुँचाते हैं, जिससे बढ़वार रुक जाती है. इससे बचाव के लिए क्लोरोफेनीफॉस या एमिडाक्लोरोपीट की 2.5 ml मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना प्रभावी माना जाता है. एक्सपर्ट ने सलाह दी कि यदि किसान देसी तरीके अपनाना चाहें तो गुड़, सड़ा हुआ गोबर और गौमूत्र से तैयार पंचगव्य का छिड़काव कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि पहले देसी उपाय आजमाएं और यदि नियंत्रण न मिले तो ही रासायनिक दवाओं का प्रयोग करें, क्योंकि दोनों तरीकों का एक साथ प्रयोग कीटों में सहनशीलता बढ़ा सकता है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें
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