जिला मुख्यालय शिवपुरी में आयोजित जनसुनवाई उस समय हंगामेदार हो गई, जब दोनों पैरों से दिव्यांग युवक अशफाक खान बैटरी वाली ट्राइसाइकिल की मांग को लेकर अधिकारियों पर भड़क उठा। युवक ने जनसुनवाई कक्ष में पहुंचते ही कलेक्टर सहित प्रशासनिक अधिकारियों पर दो वर्षों से टालमटोल और अनसुनी की गंभीर आरोप लगाए।
‘दो वर्षों से सिर्फ भरोसा दे रहे अफसर’
अशफाक खान का कहना है कि वह पिछले दो साल से बैटरी वाली ट्राइसाइकिल के लिए जनसुनवाई, सामाजिक न्याय विभाग और अन्य कार्यालयों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे केवल आश्वासन ही मिले। जनसुनवाई में नाराजगी जताते हुए उसने कहा कि 2026 में बैटरी ट्राइसाइकिल देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन वर्ष बीत जाने के बावजूद उसे आज तक यह साधन नहीं मिला।
केंद्रीय मंत्री से मदद की गुहार
हंगामा बढ़ते देख निचले कर्मचारियों ने अशफाक को जनसुनवाई कक्ष से बाहर ले जाया। बाहर आकर भी युवक ने प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जाहिर किया और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मदद की गुहार लगाई। उसने आरोप लगाया कि गरीब और बीपीएल कार्डधारी होने के बावजूद उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।
कलेक्टर को हटाने की मांग
दिव्यांग युवक ने कलेक्टर रविन्द्र कुमार चौधरी पर भी अनसुनी का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने तक की मांग कर दी। उनका कहना था कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण उन्हें पूरे साल 2025 में बार-बार जनसुनवाई और कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े, जिससे ऑटो से आने-जाने में आर्थिक बोझ भी बढ़ा। अशफाक ने बताया कि डॉक्टर द्वारा स्पष्ट रूप से बैटरी वाली साइकिल देने की सिफारिश की गई है। वह दोनों पैरों से पूरी तरह विकलांग हैं, चलने-फिरने में असमर्थ हैं और किसी प्रकार का रोजगार भी नहीं कर पाते। इसके बावजूद अब तक उन्हें जरूरी सहायक उपकरण उपलब्ध नहीं कराया गया।
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बैटरी वाली ट्राइसाइकिल की मांग पर अड़ा है दिव्यांग
वहीं, सामाजिक न्याय विभाग की ओर से कहा गया कि अशफाक खान का आवेदन स्वीकृत हो चुका है और उसे 7 अक्टूबर 2026 को बैटरी वाली ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी जाएगी। फिलहाल कलेक्टर ने साधारण ट्राइसाइकिल देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन आवेदक बैटरी वाली ट्राइसाइकिल की मांग पर अड़ा हुआ है।
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