धर्मशाला में छात्रा को न्याय देने की मांग को लेकर रोष जाहिर करतीं सामाजिक संगठन की महिलाएं।
धर्मशाला गवर्नमेंट कॉलेज की पूर्व छात्रा की संदिग्ध मौत और रैगिंग के आरोपों से जुड़े मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। कांगड़ा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश चिराग भानु सिंह की कोर्ट ने आरोपी प्रोफेसर अशोक कुमार को अंतरिम जमानत दे दी है। वही
कोर्ट ने प्रोफेसर अशोक कुमार को 25 हजार रुपए के निजी मुचलके पर 12 जनवरी तक गिरफ्तारी से राहत प्रदान की है। साथ ही, उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है।
पुलिस जांच के दौरान मृतका के दो वीडियो सामने आए हैं, जिन्होंने इस पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है। ये दोनों वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। पुलिस इनके स्रोत का पता लगा रही है।
इंसाफ की मांग को लेकर सड़क पर उतरे लोग
वहीं, शनिवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों ने डीसी और एसपी कार्यालय, धर्मशाला के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मृतका को न्याय दिलाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
धर्मशाला का वह डिग्री कॉलेज, जिसके प्रोफेसर पर आरोप लगे हैं।
छात्रा के दो वीडियो, दोनों में विरोधाभास
पहला वीडियो पठानकोट के एक अस्पताल में रिकॉर्ड किया गया था, जिसमें छात्रा प्रोफेसर अशोक कुमार पर गंभीर आरोप लगाती दिख रही है। दूसरा वीडियो लुधियाना में बनाया गया है, जिसमें छात्रा अशोक कुमार को ‘अच्छा’ बता रही है। पुलिस अब इन दोनों वीडियो की फोरेंसिक जांच करवाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दूसरा वीडियो दबाव में बनाया गया था या छात्रा ने स्वेच्छा से अपना बयान बदला था।
जांच में कॉलेज के रिकॉर्ड और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के समय को लेकर भी बड़ा विरोधाभास सामने आया है। कॉलेज का दावा है कि छात्रा आखिरी बार 29 जुलाई 2025 को कक्षा में उपस्थित थी। जबकि, परिजनों ने रैगिंग और उत्पीड़न की घटनाओं का आरोप सितंबर 2025 में होने का लगाया है।
कॉलेज की एंटी-रैगिंग और सेक्सुअल हेरेसमेंट कमेटी के रिकॉर्ड के अनुसार, जुलाई से 22 दिसंबर 2025 तक कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई थी। कॉलेज प्रशासन को इस मामले की जानकारी 22 दिसंबर को तब मिली, जब पुलिस सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर कॉलेज पहुंची।

मामले को लेकर जांच करते अधिकारी।
लुधियाना में डटी पुलिस, हर कड़ी खंगाल रही बताया जाता है कि, डीएसपी धर्मशाला निशा कुमारी के नेतृत्व में पुलिस की टीमें लगातार जांच में जुटी हैं। एक विशेष टीम लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में पल्लवी के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड और डॉक्टरों के बयान जुटा रही है। दूसरी ओर, कॉलेज में अटेंडेंस रजिस्टर, स्टाफ और छात्रों से पूछताछ कर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
UGC भी सख्त, फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने भी संज्ञान लिया है। यूजीसी ने फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी के गठन की घोषणा की है, जो यह जांच करेगी कि कॉलेज में एंटी-रैगिंग और शिकायत निवारण तंत्र को सही ढंग से लागू किया गया या नहीं। आयोग ने साफ किया है कि दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
आरोपी प्रोफेसर का पक्ष
प्रोफेसर अशोक कुमार ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि, “मुझ पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह झूठे हैं। वह छात्रा पिछले सत्र में मेरी कक्षा में थी। इस सत्र में वह किसी अन्य प्रोफेसर की कक्षा में थी। इस मामले से मेरा कोई संबंध नहीं है।”
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