स्वरा और आव्या ने अपने इस इनोवेटिव आइडिया को नाम बायोसिग्नल पेंट दिया है. यह पेंट जैसे ही प्रदूषण बढ़ने का संकेत पाता है. बैंगनी रंग से हरे रंग में बदल जाता है. जैसे ही हवा साफ होती है. फिर से अपने मूल रंग में लौट आता है. इस अनोखे विचार का चयन डिज़ाइन फॉर बायो ईथी चैलेंज 2025 प्रतियोगिता में देश के सर्वश्रेष्ठ 10 इनोवेटिव आइडिया में किया गया है.
पीएच बदलाव के सिद्धांत पर आधारित है तकनीक
स्वरा और आव्या ने बताया कि उनका यह बायोसिग्नल पेंट पीएच (pH) बदलाव के वैज्ञानिक सिद्धांत पर काम करता है. जब वायु प्रदूषण बढ़ता है, तो हवा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की मात्रा भी बढ़ जाती है. कार्बन डाइऑक्साइड एक अम्लीय (एसिडिक) गैस है, जिससे वातावरण का पीएच स्तर बदलने लगता है.जब हवा में एसिडिक कंसंट्रेशन बढ़ता है, तो यह पेंट बैंगनी से हरे रंग में परिवर्तित हो जाता है.वहीं, जैसे ही प्रदूषण कम होता है और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर घटता है, एसिडिक प्रभाव भी कम हो जाता है. जिससे पेंट का रंग हरा से दोबारा बैंगनी हो जाता है.
कार्बन कैप्चर थीम से निकला आइडिया
यह इनोवेटिव सोच कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) की थीम से प्रेरित है. छात्राओं का मानना है कि अगर सार्वजनिक स्थानों स्कूलों, अस्पतालों और घरों में इस तरह का पेंट इस्तेमाल हो. तो लोग प्रदूषण के प्रति तुरंत सतर्क हो सकते हैं और समय रहते आवश्यक कदम उठा सकते हैं.
पिता ने किया मार्गदर्शन, विचार पूरी तरह बच्चियों का
स्वरा के पिता डॉ. एम. एस. संतोष, जो सीएसआईआर-सिंफर (CSIR-CIMFR) में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं, ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटियों को वैज्ञानिक समझ और दिशा देने में मदद की है, लेकिन यह पूरा आइडिया पूरी तरह से बच्चियों की कल्पना और सोच का परिणाम है. उन्होंने कहा कि इस उम्र में इस तरह की समस्या-आधारित सोच बेहद सराहनीय है.
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचा
डिज़ाइन फॉर बायो ईथी चैलेंज 2025 प्रतियोगिता का उद्देश्य स्कूली छात्रों में बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैज्ञानिक जिज्ञासा और नवाचार को बढ़ावा देना है. यह प्रतियोगिता माईगॉव इनोवेट इंडिया प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित की गई थी. इसमें देशभर से कुल 227 इनोवेटिव आइडिया प्राप्त हुए जिनमें से केवल 10 सर्वश्रेष्ठ आइडिया चुने गए.इन चुने गए आइडिया में स्वरा और आव्या का बायोसिग्नल पेंट भी शामिल है, जो झारखंड और शहर के लिए गर्व की बात है.
केंद्रीय मंत्री करेंगे सम्मान
इस उपलब्धि के लिए स्वरा और आव्या को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. उन्हें सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट प्रदान किया जाएगा, जिसकी हार्ड कॉपी उनके घर भी भेजी जाएगी.
भविष्य की उम्मीद
स्वरा और आव्या का यह नवाचार न केवल प्रदूषण जागरूकता की दिशा में एक बड़ा कदम है. बल्कि यह भी साबित करता है कि अगर बच्चों को सही मंच और प्रोत्साहन मिले तो वे समाज की बड़ी समस्याओं के समाधान निकाल सकते हैं. बायोसिग्नल पेंट आने वाले समय में शहरी प्रदूषण को समझने और नियंत्रित करने का एक सशक्त साधन बन सकता है.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.