हर वर्ष की तरह इस बार भी उर्स मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और मेलार्थियों के पहुंचने की संभावना है. चरखा, तारामाछी, झूला, ड्रैगन नाव झूला सहित करीब 20 तरह के झूले मेले में लगाए जा रहे हैं जो बच्चों से लेकर बड़ों तक के आकर्षण का केंद्र होंगे. इसके अलावा विदेशी रोलर कोस्टर भी मेले की शान बढ़ाएगा, जिसका लोग भरपूर आनंद ले सकेंगे.
शुरू होगा चादरपोशी का सिलसिला
शहाबुद्दीन ने बताया कि परंपरा के अनुसार सबसे पहले चिमनीशाह बाबा की दरगाह पर बीसीसीएल के अधिकारियों द्वारा चादरपोशी की जाती है. इसके बाद किन्नर समाज की ओर से चादरपोशी होती है और फिर आम श्रद्धालु मजार पर चादर चढ़ाते हैं. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसमें सभी समुदायों की सहभागिता देखने को मिलती है.
अंग्रेजों के जमाने से जुड़ी है कहानी
बताया जाता है कि यह दरगाह अंग्रेजों के जमाने की माइंस से जुड़ी हुई है. उस समय यहां चिमनी का निर्माण कराया गया था, जहां से कोयले का उत्पादन होता था.भारत कोल लिमिटेड (तत्कालीन गिनकोल लिमिटेड) के कर्मचारी जब भी माइंस के अंदर काम करने जाते थे, तो चिमनीशाह बाबा की दरगाह पर माथा टेककर जाते थे और सुरक्षित बाहर निकलने पर बाबा का शुक्रिया अदा करते थे. तभी से बाबा में लोगों की गहरी आस्था बनी हुई है.
मेले में खरीदारी के भी खास इंतजाम किए गए हैं. खासकर गोल खजले की दुकानों पर हर साल भारी भीड़ देखने को मिलती है. मेले में आने वाले लोग खजले की खरीदारी जरूर करते हैं और इसकी काफी डिमांड रहती है. इसके अलावा महिलाओं के लिए कपड़े, श्रृंगार सामग्री, घरेलू सामान और बच्चों के खिलौनों की कई दुकानें सजेंगी, जिससे उन्हें खरीदारी का भरपूर मौका मिलेगा.
सांप्रदायिक सौहार्द का है प्रतीक
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. आयोजन कमेटी के वालंटियर पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर मेले में सुरक्षा पर विशेष नजर रखेंगे.असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि मेला शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके. यह मेला सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल भी है. दोनों समुदाय के लोग मिलकर इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में हर साल योगदान देते हैं और इस बार भी तन-मन से जुटे हुए हैं. हजरत चिमनीशाह बाबा का उर्स मेला न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है. बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और मनोरंजन का भी बड़ा मंच बन चुका है.
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