जबलपुर हाईकोर्ट की युगलपीठ ने लोकायुक्त से जुड़े एक मामले में प्रकरण की मूल फाइल गुम होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को फाइल गुम होने के मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सेवानिवृत्त लापरवाह अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के भी आदेश दिए गए हैं।
यह आदेश पीडब्ल्यूडी के हेड क्लर्क अनिल कुमार पाठक द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में कहा गया था कि लोकायुक्त द्वारा अगस्त 2009 में उनके खिलाफ तीन हजार रुपये की रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान उनके आवाज के नमूने लिए गए थे। बाद में प्रकरण से संबंधित मूल फाइल गुम हो गई।
मूल फाइल गुम होने के बाद लोकायुक्त की ओर से ट्रायल कोर्ट में आवेदन दायर कर आवाज के नमूनों को द्वितीयक साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जाने की मांग की गई थी। ट्रायल कोर्ट द्वारा इस आवेदन को स्वीकार किए जाने के आदेश के खिलाफ यह पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी।
सुनवाई के दौरान लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजूलता पटले ने न्यायालय को बताया कि मूल फाइल गुम होने के बाद जांच के आदेश दिए गए थे। जांच के दौरान तत्कालीन प्रभारी डीएसपी ओसकर किंडो ने फाइल गुम होने में अपनी गलती स्वीकार की थी।
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इस बीच याचिकाकर्ता की ओर से याचिका वापस लेने का आग्रह किया गया, जिसे युगलपीठ ने स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि यह समझ से परे है कि इतनी गंभीर लापरवाही के बावजूद फाइल गुम होने की एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई।
युगलपीठ ने डीजीपी को निर्देशित किया कि फाइल गुम होने के मामले में एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही कहा कि संबंधित लापरवाह अधिकारी को सेवानिवृत्त हुए चार वर्ष से अधिक का समय नहीं हुआ है, ऐसे में उसके खिलाफ विभागीय जांच भी प्रारंभ की जाए।
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