Peda Gali Deoghar: बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा ‘पेड़ा गली’ के बिना अधूरी है. यह भारत की इकलौती ऐसी गली है जहां सिर्फ शुद्ध खोये के पेड़े मिलते हैं. यहां तीन-चार पीढ़ियों से दुकानदार पारंपरिक विधि से प्रसाद तैयार कर रहे हैं. भक्तों के लिए यहां का पेड़ा मात्र मिठाई नहीं, बल्कि महादेव का ‘आशीर्वाद’ है.
इस गली में सिर्फ पेड़े की दुकान
देवघर की प्रसिद्ध पेड़ा गली कोई साधारण बाजार नहीं है. यह गली भले ही छोटी है, लेकिन इसकी पहचान बहुत बड़ी है.इस गली की सबसे खास बात यह है कि यहां आपको और किसी चीज़ की दुकान नहीं मिलेगी. न कपड़े, न चप्पल, न खिलौने यहां सिर्फ और सिर्फ पेड़े की दुकानें हैं. गली में कदम रखते ही चारों ओर पेड़े की खुशबू फैल जाती है, जो हर आने वाले भक्त को अपनी ओर खींच लेती है. कहा जाता है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन अधूरे माने जाते हैं, अगर भक्त पेड़ा लेकर वापस न जाए. यही वजह है कि जो भी श्रद्धालु यहाँ पूजा-अर्चना करने आते हैं, वे बाबा का प्रसाद और आशीर्वाद मानकर पेड़ा ज़रूर खरीदते हैं. कई लोग इसे अपने घर ले जाकर परिवार के सभी सदस्यों को खिलाते हैं, तो कई लोग इसे रिश्तेदारों और मित्रों में बाबा के प्रसाद के रूप में बाँटते हैं.
शुद्ध खोये से तैयार होता है पेड़ा
दुकानदार चंद्रप्रकाश केसरी बताते हैं कि इस गली में कई ऐसी दुकान है जहां पर एक दो नहीं बल्कि तीन से चार पीढ़ी तक के लोग काम कर रहे हैं. देवघर का पेड़ा सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि अपनी शुद्धता और परंपरा के लिए भी प्रसिद्ध है. यह पेड़ा शुद्ध दूध और खोया से पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है. इसमें न तो ज्यादा रंग होता है और न ही मिलावट. यही कारण है कि इसका स्वाद न ज्यादा मीठा लगता है और न ही फीका. एकदम संतुलित स्वाद, जो हर उम्र के लोगों को पसंद आता है.पेड़ा गली में सुबह से ही चहल-पहल शुरू हो जाती है. जैसे-जैसे बाबा मंदिर में दर्शन करने वालों की भीड़ बढ़ती है, वैसे-वैसे पेड़ा गली में भी रौनक बढ़ जाती है. सावन का महीना हो, महाशिवरात्रि हो या कोई विशेष तिथि इन दिनों यहां पैर रखने की भी जगह नहीं मिलती. कांवर लेकर आने वाले कांवरिए हों या दूर-दराज से आए श्रद्धालु, हर कोई बाबा के दर्शन के बाद सीधे पेड़ा गली पहुँचता है.
पेड़े के लिए देश भर में फेमस है यह गली
यह गली सिर्फ व्यापार का केंद्र नहीं है, बल्कि देवघर की संस्कृति और परंपरा का हिस्सा बन चुकी है. कई दुकानदारों की पीढ़ियां इसी काम से जुड़ी हुई हैं.उनके लिए पेड़ा बनाना सिर्फ रोज़गार नहीं, बल्कि सेवा है. बाबा की सेवा और भक्तों की सेवा. आज के समय में भले ही आधुनिक मिठाइयां बाजार में आ गई हों, लेकिन देवघर के पेड़े की बात ही कुछ और है. यही कारण है कि देश के कोने-कोने में देवघर का पेड़ा पहचान बना चुका है. लोग जब भी देवघर आते हैं, अपने साथ पेड़ा ले जाना नहीं भूलते. अगर आप भी कभी देवघर आएं और बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करें, तो पेड़ा गली जाना ज़रूर याद रखें.वहाँ जाकर आपको सिर्फ मिठाई नहीं मिलेगी, बल्कि आस्था, विश्वास और परंपरा का एक मीठा अनुभव मिलेगा. क्योंकि देवघर का पेड़ा सिर्फ पेड़ा नहीं है. यह बाबा भोलेनाथ का मीठा आशीर्वाद है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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