देवघर के बसवरिया गांव के एक MBA डिग्री धारक किसान ने बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर स्ट्रॉबेरी की खेती से सफलता की नई इबारत लिखी है. बिना सरकारी मदद के 7 एकड़ में खेती कर रहे यह किसान न केवल लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि गांव के 25 लोगों को रोजगार देकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहे हैं.
एमबीए की पढ़ाई कर चूका है किसान:
किसान ने पढ़ाई के दौरान ही कुछ अलग करने का सपना देख लिया था. उन्होंने अकाउंट विषय से ग्रेजुएशन किया और इसके बाद डिस्टेंस एजुकेशन से एमबीए की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई पूरी होने के बाद चाहें तो वे सरकारी नौकरी की तैयारी कर सकते थे, लेकिन उन्होंने कभी इस दिशा में ध्यान नहीं दिया. उनका मानना था कि नौकरी से बेहतर है खुद का काम किया जाए, जिससे न सिर्फ आत्मनिर्भर बना जा सके बल्कि दूसरों को भी रोजगार दिया जा सके. इसी सोच ने उन्हें आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर प्रेरित किया.
साल 2021 मे शुरु की स्ट्रॉबेरी की खेती:
साल 2021 में उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करने का फैसला लिया. शुरुआत आसान नहीं थी, क्योंकि जमीन बंजर थी और किसी भी तरह की सरकारी सुविधा या विशेष मदद उन्हें नहीं मिली. फिर भी उन्होंने अपनी जानकारी, मेहनत और लगातार प्रयास से जमीन को उपजाऊ बनाया.धीरे-धीरे मिट्टी की गुणवत्ता सुधारी गई, सिंचाई की व्यवस्था की गई और आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाया गया. इसका परिणाम यह हुआ कि कुछ ही समय में वही बंजर जमीन स्ट्रॉबेरी की लाल-लाल फसलों से भर गई.
7 एकड़ में कर रहे है स्ट्रॉबेरी की खेती:
आज यह किसान बिना किसी सरकारी सहायता के लगभग 7 एकड़ जमीन में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं. उनकी फसल न सिर्फ स्थानीय बाजार में बल्कि आसपास के इलाकों में भी खूब पसंद की जाती है. स्ट्रॉबेरी की खेती से उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है. सबसे खास बात यह है कि उनकी इस खेती से गांव के लोगों को भी लाभ मिल रहा है.
25 लोगो को दे चुके है रोजगार:
वर्तमान समय में यह किसान करीब 25 लोगों को नियमित रूप से रोजगार दे रहे हैं. खेती के काम में गांव के युवक युवतियां जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं. इससे गांव में पलायन भी कम हुआ है और लोगों को अपने ही क्षेत्र में काम मिल रहा है. यह किसान आज सिर्फ अपनी सफलता की कहानी नहीं लिख रहा, बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुका है.
युवाओं के लिए बने मिसाल:
बसवरिया गांव का यह किसान आज यह संदेश दे रहा है कि खेती घाटे का सौदा नहीं है, बल्कि सही योजना, मेहनत और लगन से इसे लाभ का बड़ा जरिया बनाया जा सकता है.उनकी कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो नौकरी के पीछे भागते हैं और खेती को कमतर समझते हैं. यह किसान सच में बंजर जमीन पर सोना उगाने का काम कर रहा है.
About the Author
मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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