जानें क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने बताया कि इस साल होली 4 मार्च को पूरे देश में मनाई जाएगी. उनके अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 56 मिनट से हो रही है, जो 3 मार्च 2026 की शाम 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगी. सामान्य रूप से पूर्णिमा तिथि और भद्रा का संयोग में ही होलिका दहन किया जाता है, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है.
जहां 2 मार्च को पूर्णिमा तिथि लगते ही भद्रा भी प्रारंभ हो जाएगी. भद्रा 3 मार्च की सुबह 5 बजकर 20 मिनट तक रहेगी. शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल रहित पूर्णिमा में होलिका दहन किया जाता है. इसके अलावा 3 मार्च को चंद्रग्रहण भी लगने जा रहा है. ग्रहण के दिन शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है. इसी कारण 3 मार्च को होलिका दहन करना उचित नहीं रहेगा.
2 मार्च को करें होलिका दहन
होलिका दहन 2 मार्च को ही किया जाना चाहिए. हालांकि उस दिन भी भद्रा का प्रभाव रहेगा, लेकिन शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखकर दहन किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि 2 मार्च की रात 11 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहेगा. इस एक घंटे के बीच विधि-विधान से पूजन और दहन करना फलदायी माना जाएगा.
इन मंत्रो का करें जाप
होलिका दहन के समय ‘ॐ होलिकायै नमः’ मंत्र का जाप करने की भी सलाह दी गई है. मान्यता है कि इस मंत्र के जप से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है. होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चाई और आस्था की हमेशा विजय होती है.
जानें क्या पड़ेगा भद्रा का प्रभाव
इस वर्ष भद्रा मृत्यु लोक में रहेगी, जिसे विशेष रूप से अशुभ माना जाता है. इसलिए लोगों को समय का विशेष ध्यान रखते हुए ही होलिका दहन करना चाहिए. ज्योतिषाचार्य का कहना है कि शुभ मुहूर्त में किया गया पूजन सभी दोषों को शांत करता है और ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करता है.
जानें कब लगेगा साल का पहला चंद्रग्रहण
वहीं, 3 मार्च को लगने वाला चंद्रग्रहण दोपहर 3 बजकर 23 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. भारत में यह ग्रहण शाम 5 बजकर 59 मिनट से दिखाई देगा और 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाएगा. इसके अलावा सूतक काल में पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. कुल मिलाकर इस वर्ष होली और होलिका दहन विशेष ग्रह-नक्षत्रों के संयोग में मनाए जाएंगे. इसलिए श्रद्धालुओं को पंचांग और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए ही पर्व मनाना चाहिए. ताकि त्योहार का पूरा शुभ फल प्राप्त हो सके.
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