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दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट स्कैम केस में 4 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। यह एक्शन 3 नवंबर को दर्ज इन्वेस्टमेंट फ्रॉड केस में लिया गया, जिसमें दिल्ली के एक व्यक्ति से ₹27 लाख की ठगी की गई थी।
क्राइम ब्रांच DCP आदित्य गौतम ने बताया कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से जुड़ी शिकायतों में कुल ₹7.16 करोड़ के ट्रांजैक्शन की जानकारी सामने आई है।
सभी आरोपी बड़े साइबर क्राइम सिंडिकेट का हिस्सा थे। जो देशभर में 300 से ज्यादा साइबर फ्रॉड में शामिल है। सिंडिकेट धोखाधड़ी की रकम को म्यूल बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किया जाता था। ये खाते पुणे-हैदराबाद में संचालित एक गिरोह के फर्जी खाते थे।
शिकायतकर्ता ने क्या बताया…
- शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे अनजान लोगों ने ऑनलाइन संपर्क कर एक फर्जी इन्वेस्टमेंट ग्रुप में जोड़ा।
- मनगढ़ंत मुनाफा दिखाया गया। आरोपियों ने ‘Conifer’ नाम का एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराया। लॉजिस्टिक्स कंपनी के IPO में निवेश के लिए उकसाया।
- एप पर दिख रहे रिटर्न को असली मानकर पीड़ित ने ₹27.2 लाख कई खातों में ट्रांसफर कर दिए।
- जब उसने और निवेश करने से इनकार किया, तो उसका एप अकाउंट फ्रीज कर दिया गया।

जांच में क्या सामने आया…
- फाइनेंशियल एनालिसिस में पाया गया कि पैसों को कई ट्रांसफर, ATM से नकद निकासी और अन्य खातों के जरिए तेजी से लेयर किया गया। इन खातों से किसी वैध व्यावसायिक गतिविधि का कोई प्रमाण नहीं मिला।
- गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पुणे के मयूर मारुति सानस और गौरव जाधव, तथा हैदराबाद के मोहम्मद यूसुफ अली और मोहम्मद अबरार खान के रूप में हुई है।
- पुलिस के मुताबिक आरोपी पुणे के एक होटल में एक साथ रह रहे थे और ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर करने के लिए सक्रिय रूप से फर्जी खातों का संचालन कर रहे थे।
- चारों आरोपी कई राज्यों में चल रहे इन्वेस्टमेंट स्कैम से जुड़े एक बड़े साइबर सिंडिकेट के लिए फर्स्ट-लेयर फर्जी खातों का संचालन कर रहे थे।
- पुलिस ने इनके पास से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल चैट बरामद की हैं, जिनसे धोखाधड़ी से मिले पैसों को मिलकर संभालने की पुष्टि होती है।
पुलिस के मुताबिक, सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान करने और अपराध से जुड़े बाकी पैसों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

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