उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मसूरी वन प्रभाग से जुड़े एक मामले में सीबीआई, केंद्र सरकार और उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी किया है. ये नोटिस मसूरी वन प्रभाग में 7,375 बाउंड्री पिलर्स के लापता होने और वहां तैनात रहे वन अधिकारियों की कथित आय से अधिक संपत्ति की जांच के संबंध में दिया गया है.
क्या है मामला
दरअसल पिलर गायब होने का मामला 2023 में तब सामने आया जब तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक (वर्किंग प्लान) संजीव चतुर्वेदी ने मसूरी वन प्रभाग के सभी बाउंड्री पिलर्स के सर्वे का आदेश दिया. तत्कालीन DFO मसूरी द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में कुल 12,321 पिलर्स में से 7,375 के जमीन पर पूरी तरह गायब होने का चौंकाने वाला खुलासा हुआ था. इनमें से लगभग 80 प्रतिशत पिलर्स मसूरी और रायपुर रेंज में हैं, जिन्हें रियल एस्टेट के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है. इस मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी.
सरकारी एक्शन का इंतजार!
इस मामले में जून और अगस्त में IFS संजीव चतुर्वेदी ने उत्तराखंड के हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (HoFF) को लिखी चिट्ठी में मामले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपने की मांग की थी. साथ ही तैनात रहे वन अधिकारियों के नाम पर दर्ज भारी अचल संपत्तियों की भी जांच का अनुरोध किया गया था. इस बीच केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भी वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के उल्लंघन के आरोपों को लेकर उत्तराखंड सरकार को जांच और कार्रवाई को कहा था. इस बीच HoFF ने शिवालिक फॉरेस्ट रेंज के कंजर्वेटर राजीव धीमान की अध्यक्षता में एक समिति गठित की. हालांकि हाईकोर्ट में दाखिल PIL में समिति के मंतव्य को लेकर शंका व्यक्त की गई है.
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