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Dehradun News: करीब चार दशकों में पहली बार जनवरी में गढ़वाल हिमालय का तुंगनाथ क्षेत्र बर्फ़विहीन रहा है. वैज्ञानिक इसे जलवायु असामान्यता बता रहे हैं. बर्फबारी न होने से जटामांसी, कुटकी और अतीस जैसी औषधीय वनस्पतियों पर संकट गहराया है.
देहरादून: करीब चार दशकों में पहली बार गढ़वाल हिमालय के तुंगनाथ क्षेत्र की ऊंची चोटियां जनवरी महीने में अब तक बर्फ़ से वंचित रही हैं. इसे वैज्ञानिक जलवायु असामान्यता मान रहे हैं और इससे अल्पाइन पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरे की चेतावनी दी जा रही है. विशेषज्ञों के अनुसार बारिश और बर्फबारी की लंबे समय से कमी का सीधा असर अल्पाइन क्षेत्र की महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों पर पड़ने लगा है. इनमें जटामांसी (Nardostachys jatamansi), कुटकी (Picrorhiza kurroa) और अतीस (Aconitum heterophyllum) जैसी दुर्लभ प्रजातियां शामिल हैं.
तुंगनाथ स्थित हाई एल्टीट्यूड प्लांट फिज़ियोलॉजी रिसर्च सेंटर (HAPPRC) के संस्थापक और पद्मश्री से सम्मानित वैज्ञानिक आदित्य नारायण पुरोहित ने कहा कि क्षेत्र के प्राकृतिक वर्षा चक्रों में स्पष्ट बदलाव दिख रहा है. लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ में शीतकालीन बर्फबारी का न होना इस नाज़ुक अल्पाइन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा है, जो कई दुर्लभ और स्थानिक वनस्पति व जीव-जंतुओं का आश्रय है.
अन्य वैज्ञानिकों का कहना है कि कई औषधीय पौधे मिट्टी में नमी बनाए रखने, बीजों की सुप्त अवस्था तोड़ने और अंकुरण की प्रक्रिया के लिए लंबे समय तक जमी बर्फ़ पर निर्भर रहते हैं. बर्फ़ न होने से ये प्रक्रियाएं बाधित हो रही हैं. शुष्क हवा और सूखी मिट्टी भी अल्पाइन पारिस्थितिकी तंत्र के सामान्य कार्य में रुकावट डाल रही हैं.
HAPPRC के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी सुदीप सेमवाल ने बताया कि बर्फ़ प्राकृतिक इंसुलेटर की तरह काम करती है, जो मिट्टी से गर्मी के नुकसान को रोककर उसे अपेक्षाकृत गर्म बनाए रखती है. इससे जड़ों की सक्रियता, पौधों का जीवन और शुरुआती वृद्धि संभव होती है. उन्होंने कहा कि ये पौधे हिमालयी परिस्थितियों के अनुकूल हैं, लेकिन बदलते मौसम से इनका संतुलन बिगड़ रहा है.
वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि इस क्षेत्र में व्यवस्थित रूप से बर्फबारी का रिकॉर्ड 1985 के बाद से ही रखा जा रहा है और यह पहली बार है जब तुंगनाथ में जनवरी का महीना केवल पाले के साथ बीता है, जबकि अब तक एक भी बर्फबारी दर्ज नहीं हुई है.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें
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