रक्षा उत्पादन सेक्टरों को जल्द ही अग्निवीरों के रूप में एक प्रशिक्षित, अनुशासित और कुशल फौज मिलने वाली है। साल 2026-27 के मध्य में अग्निवीरों का पहला बैच सेवानिवृत्त हो जाएगा। इनकी संख्या करीब एक लाख है। इनमें से कुछ तो सेना में नियमित हो जाएंगे जबकि अन्य अग्निवीरों के लिए सैन्य बलों समेत विभिन्न विभागों व इकाइयों में रोजगार के अवसर खुले रहेंगे।
चूंकि यह अग्निवीर रक्षा क्षेत्र से ही जुड़े हैं लिहाजा देश की डिफेंस, एयरोस्पेस व रणनीतिक सेक्टर की मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां भी चाहती हैं कि इनकी कुशलता व क्षमताओं का इस्तेमाल किया जाए। यही सोच अग्निवीरों के लिए इस सेक्टर में रोजगार के बड़े अवसर सृजित करेगी। इस दौरान रोजगार मिलने में आसानी हो, इसके लिए सरकार राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (एनएसक्यूएफ) के तहत अग्निवीरों के प्रशिक्षण को मान्यता दिलवाएगी।
भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि रक्षा कौशल इको सिस्टम में अग्निवीरों की बड़ी भूमिका रहने वाली है। अग्निवीर योजना ने युवा ऊर्जा, अनुशासन और तकनीकी दक्षता का एक विशाल भंडार खोल दिया है। हर साल हजारों अग्निवीर लॉजिस्टिक्स, आईटी सिस्टम, वाहन रखरखाव, हथियार संचालन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में गहन प्रशिक्षण पूरा करेंगे। ऐसे अग्निवीर रक्षा उत्पादन, सुरक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर रक्षा और इससे संबंधित उद्योगों के लिए तैयार कुशल मानव शक्ति के रूप में काम कर सकते हैं।
रक्षा सचिव का मानना है कि पंजाब अपनी मजबूत मिलिट्री परंपरा के साथ इन अग्निवीरों का अच्छा उपयोग कर सकता है। इन्हें डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इको सिस्टम में जाने के लिए संस्थागत रास्ते दे सकता है, चाहे वे सुपरवाइजर, इक्विपमेंट मेंटेनर या एंटरप्रेन्योर के रूप क्यों न हों।
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