जनसुनवाई शुरू होते ही अंधेरा
ग्रामीणों के अनुसार, मंत्री जैसे ही चौपाल में बैठे और लोगों की समस्याएं सुननी शुरू कीं, कुछ ही देर में बिजली चली गई. पूरे चौपाल क्षेत्र में अंधेरा छा गया. पहले तो लोग इसे कुछ मिनट की सामान्य ट्रिपिंग मानते रहे, लेकिन जब काफी देर तक बिजली नहीं आई तो हालात असहज हो गए. इसके बाद ग्रामीणों ने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाई और उसी रोशनी में अपनी समस्याएं मंत्री के सामने रखीं. यह दृश्य खुद में ग्रामीण इलाकों की बिजली व्यवस्था की सच्चाई बयान कर रहा था.
मोबाइल टॉर्च बनी सहारा
अंधेरे के बावजूद ग्रामीणों का उत्साह कम नहीं हुआ. बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी मोबाइल की रोशनी में अपनी बात कहते नजर आए. किसी ने खेतों में बिजली नहीं होने की शिकायत की, तो किसी ने रात में बार-बार ट्रिपिंग से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात कही. कई ग्रामीणों ने कहा कि गांव में बिजली का हाल ऐसा है कि दिन में भी भरोसा नहीं रहता और रात में तो अंधेरे के सिवा कुछ नहीं मिलता.
मंत्री के सामने उजागर हुई व्यवस्था की हकीकत
यह पूरी स्थिति प्रभारी मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के सामने ही घटित हुई. ग्रामीणों का कहना था कि वे लंबे समय से बिजली विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा. चौपाल के दौरान बिजली गुल होना उनके लिए इस बात का सबूत बन गया कि समस्या केवल कागजों में नहीं, बल्कि हकीकत में कितनी गंभीर है.
रात्रि चौपाल का उद्देश्य और संदेश
प्रभारी मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ गांवों में रात्रि चौपाल इसलिए कर रहे हैं ताकि आमजन बिना किसी झिझक के अपनी बात सीधे रख सके. पांचोली गांव की यह घटना इस बात का उदाहरण बन गई कि जनसुनवाई केवल शिकायत सुनने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि मौके पर ही व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति भी सामने आनी चाहिए. अंधेरे में हुई यह जनसुनवाई ग्रामीण बिजली व्यवस्था पर बड़ा सवाल छोड़ गई है.
ग्रामीणों को समाधान की उम्मीद
चौपाल के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब उनकी बिजली समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा. उनका कहना है कि जब मंत्री के सामने ही बिजली गुल हो सकती है, तो आम दिनों में हालात कैसे रहते होंगे, यह समझना मुश्किल नहीं. ग्रामीण चाहते हैं कि इस घटना के बाद केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में मोबाइल की टॉर्च के सहारे अपनी समस्याएं न बतानी पड़ें.
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