Agriculture News: डॉ मनोज कुमार साहू ने लोकल 18 से कहा कि विशेष रूप से ठंड के मौसम में लगने वाले कीट और रोगों से बचाव जरूरी है. सर्दी के दिनों में भिंडी की फसल पर माहू (एफिड) का प्रकोप ज्यादा देखा जाता है. इससे पत्तियां सिकुड़ जाती हैं और पौधों का बढ़ना रुक जाता है.
उन्होंने आगे बताया कि भिंडी की बेहतर ग्रोथ और अधिक उत्पादन के लिए पौधे से पौधे की दूरी 15 सेंटीमीटर और कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर रखना जरूरी है. सही दूरी रखने से पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व, हवा और धूप मिलती है, जिससे फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.
समय पर निगरानी और नियंत्रण जरूरी
डॉ मनोज कुमार साहू ने विशेष रूप से ठंड के मौसम में लगने वाले कीट और रोगों से बचाव पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ठंड के दिनों में भिंडी की फसल पर माहू (एफिड) का प्रकोप अधिक देखा जाता है, जिससे पत्तियां सिकुड़ जाती हैं और पौधों की बढ़वार रुक जाती है. इससे बचाव के लिए समय पर निगरानी और नियंत्रण बेहद जरूरी है. भिंडी की अच्छी बढ़वार के लिए सल्फर का स्प्रे करना भी लाभकारी बताया गया है. सल्फर के छिड़काव से पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है और फसल अधिक मजबूत बनती है. इसके अलावा भिंडी की पत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले कैटरपिलर के नियंत्रण के लिए इमेमेक्टिन बेंजोएट का छिड़काव किया जा सकता है.
डॉ साहू ने आगे कहा कि भिंडी की फसल में व्हाइट फ्लाई भी एक प्रमुख कीट है, जो वायरस रोग फैलाने का कारण बन सकता है. इसके नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड दो एमएल प्रति लीटर पानी की दर से स्प्रे करने की सलाह दी गई है. समय पर दवा का उपयोग करने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में बाजार में भिंडी के दाम काफी अच्छे चल रहे हैं, ऐसे में यदि किसान ऑफ सीजन में भिंडी की खेती करते हैं और उचित देखरेख अपनाते हैं, तो कम समय में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. कृषि विज्ञान केंद्र रायपुर किसानों से अपील कर रहा है कि वे वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करें, जिससे लागत कम हो और आय में बढ़ोतरी हो सके.
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