दौसा जिले में कांग्रेस द्वारा आयोजित अरावली बचाओ आंदोलन के तहत निकाले गए विरोध प्रदर्शन के दौरान उस समय विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब डाक बंगले का मीटिंग हॉल बंद मिला। हॉल का ताला बंद देख कांग्रेस कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और गेट का ताला तोड़ने का प्रयास करने लगे।
हालांकि, कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामजीलाल ओढ़ की समझाइश और सांसद मुरारीलाल मीणा के हस्तक्षेप से स्थिति को संभाल लिया गया और मामला शांत हो गया। वहीं, विधायक डीसी बैरवा ने इस पूरे घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।
सरकार के खिलाफ नारेबाजी
दरअसल, कांग्रेस द्वारा अरावली बचाओ आंदोलन के तहत नेहरू गार्डन से गांधी तिराहे तक पैदल मार्च निकाला गया। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शन में सांसद मुरारीलाल मीणा, विधायक दीनदयाल बैरवा, पूर्व मंत्री परसादी लाल मीणा, पूर्व विधायक ओमप्रकाश हुड़ला, जी.आर. खटाना सहित कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामजीलाल ओढ़ और बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल रहे।
बंगले के लॉन में बैठ गए कांग्रेसी
गांधी तिराहे पर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद सभी कांग्रेसी डाक बंगले पहुंचे, जहां मीटिंग हॉल का ताला बंद मिला। इसके बाद सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री सहित सभी नेता और कार्यकर्ता डाक बंगले के लॉन में बैठ गए। इस दौरान बैठने के लिए कुर्सियों तक की व्यवस्था नहीं थी, जिससे नेताओं को सीमेंट की बेंचों पर बैठना पड़ा।
गेट का ताला तोड़ने का प्रयास किया
सांसद मुरारीलाल मीणा ने अधिकारियों को फोन कर कुर्सियों की व्यवस्था कराने को कहा, लेकिन इसके बावजूद कोई व्यवस्था नहीं की गई। इससे युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ता नाराज हो गए और उन्होंने मीटिंग हॉल के गेट का ताला तोड़ने का प्रयास किया। कुछ कार्यकर्ताओं ने ताले पर ठोकरें मारी, जबकि एक कार्यकर्ता पत्थर लेकर भी पहुंच गया।
स्थिति बिगड़ती देख कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामजीलाल ओढ़ ने मौके पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं को समझाया, वहीं सांसद ने भी युवाओं को संयम बरतने की अपील की, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
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बैठक की अनुमति न देना गलत है
इस संबंध में विधायक डीसी बैरवा ने कहा कि डाक बंगले के मीटिंग हॉल में बैठक को लेकर पूर्व में ही प्रशासन को सूचना दी गई थी, इसके बावजूद हॉल का ताला नहीं खोला गया। उन्होंने कहा कि यह भवन तत्कालीन कांग्रेस विधायक मुरारीलाल मीणा द्वारा विधायक निधि से करीब 40 लाख रुपए की लागत से निर्मित कराया गया था। इसके बावजूद बैठक की अनुमति न देना गलत है। इस मामले को लेकर जिला कलेक्टर से बात की जाएगी।
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