फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सात साल की नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में मोहम्मद शाहनवाज को नौ साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि मौलवी का अपराध गंभीर था और दोषी का धार्मिक गुरु होने की वजह से विश्वासघात और भी गंभीर हो गया।
यह सजा पीठासीन अधिकारी अमरजीत सिंह लंगेह ने पुलिस स्टेशन नगरोटा में दर्ज एक मामले में सुनाई। आरोपी को बीती 24 फरवरी को अपराध के लिए दोषी ठहराया गया था। यह मामला 12 मार्च 2018 का है। अभियोजन पक्ष ने अपराध को गंभीर बताते हुए दोषी के लिए ज्यादा-से-ज्यादा सजा की मांग की थी। उसके अनुसार नाबालिग एक मस्जिद में कुरान की क्लास में जाती थी जहां आरोपी मौलवी था।
ट्रायल के दौरान अभियोजन ने 16 गवाहों से पूछताछ की। इनमें पीड़िता, उसकी मां, करीबी रिश्तेदार, स्वतंत्र गवाह, चिकित्सा विशेषज्ञ और जांच अधिकारी शामिल थे। अदालत ने माना कि पीड़ित की गवाही प्राकृतिक, ठोस और भरोसेमंद थी। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना देने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास काटना होगा। साथ ही निर्देश दिया कि जमा होने पर 25 हजार रुपये पीड़ित को दिए जाएं और बाकी रकम सरकारी खजाने में जमा की जाए।
दोषी करीब सात की सजा भुगत चुका है। अदालत ने इसे सजा में सेट ऑफ करने के निर्देश देते हुए दोषी को बाकी समय काटने के लिए अम्फला जेल में रखने के लिए कहा। अदालत ने मुआवजे की भी सिफारिश की। आदेश की एक कॉपी आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जम्मू को भेजे जाने के भी निर्देश दिए। जेएनएफ
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