प्रतापगढ़: अम्बावली गांव के किसान अंतिम कुमार जैन ने फिलीपींस के सॉफ्ट गन्ने की खेती कर मेवाड़ में नई क्रांति ला दी है. हाथ से छिलने वाले और अत्यधिक रसीले इस गन्ने की खेती पूरी तरह जैविक तरीके से की जा रही है, जो किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा जरिया बन गई है.
इस विदेशी किस्म की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कोमलता (Softness) है. यह गन्ना सामान्य गन्ने की तुलना में काफी नरम होता है, जिसे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर दांत वाले लोग भी बिना किसी कठिनाई के आसानी से खा सकते हैं. यह गन्ना इतना सॉफ्ट है कि इसे हाथ से ही छीला जा सकता है. अधिक रस और प्राकृतिक मिठास के कारण जूस विक्रेताओं और उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग बहुत अधिक है.
पूरी तरह जैविक और भरोसेमंद खेती
अंतिम कुमार जैन इस गन्ने की खेती पूरी तरह जैविक पद्धति से कर रहे हैं. वे रासायनिक खादों के बजाय देसी खाद और पौधों की पत्तियों से तैयार खाद का उपयोग करते हैं. जैविक होने के कारण इसकी शुद्धता पर लोगों का अटूट भरोसा बना हुआ है. किसान का अनुभव बताता है कि एक बार बुवाई के बाद तीसरी फसल तक गन्ने की मोटाई और रस की मात्रा निरंतर बढ़ती जाती है, जिससे लागत कम और मुनाफा अधिक होता है.
मेवाड़ की मिट्टी और भविष्य की योजनाएं
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मेवाड़ की मिट्टी गन्ने के लिए अत्यंत अनुकूल है. अंतिम कुमार अब ‘गोल्डन शेड’ नामक नई गन्ना वैरायटी पर भी काम कर रहे हैं, जो अगले साल तक बड़े स्तर पर खेतों में नजर आएगी. गन्ने की इस खेती में हर 15 दिन में सिंचाई पर्याप्त होती है और बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी की आवश्यकता नहीं पड़ती. इस सफल मॉडल से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान अब इस विदेशी वैरायटी के बीज की मांग कर रहे हैं.
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Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें
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