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Chia Seeds Cultivation Tips: राजस्थान में किसान परंपरागत फसलों से हटकर अब चिया सीड्स की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. कम लागत, कम जोखिम और बेहतर मुनाफे के कारण यह फसल किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ के अनुसार चिया की फसल चार महीने में तैयार हो जाती है और एक बीघा में 2 से 3 क्विंटल उत्पादन संभव है. बाजार में इसके दाम 15 से 25 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक मिलते हैं, जिससे किसान प्रति बीघा 40 से 45 हजार रुपये तक कमा सकते हैं.
किसानों के लिए परंपरागत फसलों से हटकर चिया सीड्स की खेती फायदे का सौदा है. इसकी खेती में कम लागत और बेहतर मुनाफे मिलता है. इस कारण राजस्थान में इसकी खेती बढ़ रही है. बाजार में इसके अच्छे दाम मिलने और जोखिम कम होने के कारण किसान तेजी से इस फसल को अपना रहे हैं. चिया सीड्स की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी मानी जा रही है, इसलिए इसकी बाजार में मांग बनी रहती है.

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि पारंपरिक फसलों की तुलना में चिया की खेती अधिक लाभकारी साबित हो रही है. इसकी खेती में बीज की मात्रा कम लगती है, जिससे लागत घट जाती है. इस खेती में कीटनाशकों और खाद की आवश्यकता भी सीमित रहती है, जबकि सिंचाई कम करनी पड़ती है. इन कारणों से यह फसल जोखिम रहित और किसानों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद बनती जा रही है. चिया की खेती कम समय में पककर तैयार हो जाती है.

उन्होंने बताया कि चिया सीड्स की फसल लगभग चार महीने में तैयार हो जाती है. इसकी बुवाई के लिए अक्टूबर से नवंबर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. फसल को अधिक देखभाल की जरूरत नहीं होती और सामान्य परिस्थितियों में केवल दो बार निराई-गुड़ाई करने से भी अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है, जिससे किसानों का श्रम और खर्च दोनों कम होते हैं. समय समय में फसल पकने के कारण किसान खेत में इसके बाद तुरंत दूसरी फसल भी लगा सकते हैं.
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एग्रीकल्चर एक्सपर्ट ने बताया कि एक बीघा में औसतन 2 से 3 क्विंटल तक चिया सीड्स का उत्पादन हो सकता है. मंडियों में इसके दाम 15 से 25 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक मिल जाते हैं. इस प्रकार किसान एक बीघा से लगभग 40 से 45 हजार रुपये तक का लाभ कमा सकते हैं, जो अन्य पारंपरिक फसलों की तुलना में काफी अधिक होता है. इसके अलावा इसमें कीटनाशक की भी अधिक आवश्यकता नहीं होने से अलग से भी बचत होती है.

उन्होंने बताया कि चिया सीड्स की खेती के प्रति किसानों की रुचि लगातार बढ़ रही है और बाजार में इसकी मांग भी तेजी से बढ़ रही है. यदि किसान वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करके इसकी खेती करें, तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो सकते हैं. सही बीज चयन, समय पर बुवाई और संतुलित पोषण प्रबंधन से किसानों को अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है.

चिया सीड्स स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी माना जाता है. इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर, प्रोटीन, मिनरल्स, कैल्शियम, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं. यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने, हृदय और मधुमेह जैसी बीमारियों में सहायक माना जाता है. इसके अलावा इसका उपयोग घरेलू उपाय में भी किया जाता है.
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