कृषि उपज मंडी समिति परिसर स्थित मूंगफली खरीद केंद्र पर किसानों को भारी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी दावों के विपरीत, समर्थन मूल्य पर मूंगफली बेचने पहुंचे किसानों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। केंद्र पर बैठने की व्यवस्था नहीं
किसानों के सामने सबसे गंभीर समस्या बायोमेट्रिक सत्यापन को लेकर खड़ी हो गई है। बड़ी संख्या में किसानों के फिंगर प्रिंट मशीन से मैच नहीं हो पा रहे, जिससे वे घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी बिना मूंगफली बेचे निराश लौट रहे हैं। खासतौर पर बुजुर्ग किसान, महिलाएं और खेतों में लंबे समय तक काम करने वाले किसानों के फिंगर प्रिंट घिस जाने के कारण अधिक दिक्कत झेल रहे हैं।
मोबाइल हॉटस्पॉट पर चल रहा सिस्टम
किसानों ने आरोप लगाया कि क्रय-विक्रय सहकारी समिति द्वारा खरीद केंद्र पर स्थायी वाई-फाई कनेक्शन नहीं कराया गया है। पूरी व्यवस्था मोबाइल हॉटस्पॉट के सहारे चलाई जा रही है, जिससे नेटवर्क बार-बार बाधित होता है। इसका सीधा असर बायोमेट्रिक सत्यापन पर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि ई-मित्र केंद्रों पर उनके फिंगर प्रिंट तुरंत सत्यापित हो जाते हैं, लेकिन समिति की मशीनों पर घंटों प्रयास के बाद भी पहचान नहीं हो पाती।
किसानों की चार प्रमुख मांगें
किसानों ने प्रशासन के सामने चार मांगें रखी हैं—
- ओटीपी आधारित सत्यापन प्रणाली को तत्काल लागू किया जाए।
- खरीद केंद्र पर स्थायी वाई-फाई कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए।
- खराब और असफल बायोमेट्रिक मशीनों को बदला जाए।
- फिंगर प्रिंट के साथ आइरिश रिकॉग्नाइजेशन प्रणाली शुरू की जाए।
प्रभारी की गैरहाजिरी से बढ़ीं दिक्कतें
खरीद केंद्र पर जिम्मेदार प्रभारी के नियमित रूप से मौजूद न रहने से भी अव्यवस्था गहराती जा रही है। किसानों को सही जानकारी नहीं मिल पाती और तकनीकी समस्या आने पर तत्काल समाधान नहीं हो पा रहा। इससे गुस्से और बेबसी दोनों का माहौल बना हुआ है।
ओटीपी सत्यापन दोबारा लागू करने की मांग
किसानों ने प्रशासन से ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आधारित सत्यापन प्रणाली को फिर से शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब ओटीपी के माध्यम से सत्यापन होता था, तब किसी को परेशानी नहीं होती थी। यह व्यवस्था बुजुर्ग किसानों, महिलाओं और उन किसानों के लिए राहत बन सकती है, जिनके फिंगर प्रिंट मशीन पर स्पष्ट दर्ज नहीं हो पाते।
जिला कलेक्टर के निर्देश कागज़ों में सीमित
जिला कलेक्टर स्वाति चौहान द्वारा खरीद केंद्र का निरीक्षण किया गया था। किसानों ने तब भी वही समस्याएं सामने रखीं। कलेक्टर ने अधिकारियों को फिंगर प्रिंट के साथ ‘आइरिश रिकॉग्नाइजेशन’ यानी आंख की स्कैनिंग आधारित सत्यापन शुरू करने के निर्देश दिए थे, ताकि वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध हो सके। लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नजर नहीं आया। ना नई मशीनें बदली गईं, ना वाई-फाई लगाया गया और ना ही प्रभारी बदला गया।
बुजुर्ग और महिलाएं खाली लौटने को मजबूर
आज भी कई वृद्ध किसान और महिलाएं बायोमेट्रिक सत्यापन न होने के कारण खाली हाथ घर लौट गए। किसानों का कहना है कि वे रोज बाजार पहुंचते हैं, घंटों कतार में खड़े रहते हैं, लेकिन मशीन उन्हें पहचान नहीं पाती। इससे उनका समय, मेहनत और उम्मीद तीनों पर पानी फिर रहा है।
समर्थन मूल्य घोषित, सिस्टम खरीदने को तैयार नहीं
सरकार की ओर से मूंगफली का समर्थन मूल्य ₹7263 प्रति क्विंटल और मूंग का ₹8768 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। फलोदी जिला मूंगफली उत्पादन में अग्रणी माना जाता है, जहां हर वर्ष हजारों क्विंटल की खरीद होती है। इस बार तकनीकी खामियों और व्यवस्थागत लापरवाही के चलते किसान अपनी उपज बेचने से वंचित हो रहे हैं।
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