ऑस्ट्रेलिया निवासी NRI की चंडीगढ़ सेक्टर-17 स्थित व्यावसायिक संपत्ति पर कथित अवैध कब्जे के मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कर शोरूम को सील कर दिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब पीड़ित परिवार ने चंडीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया से मुलाकात कर शिकायत दी। प्रशासक के निर्देश के बाद पुलिस हरकत में आई। खबर लिखे जाने तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान सेक्टर-37 निवासी विक्रम सिंह के रूप में हुई है। हिस्सेदारी को लेकर शुरू हुआ विवाद धर्मेंद्र कश्यप और शैलेंद्र कश्यप, स्वर्गीय मनमोहन कश्यप के कानूनी वारिस हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सेक्टर-17-बी स्थित एससीओ नंबर 103-104 की चौथी मंजिल पर आपराधिक अतिक्रमण, ताले तोड़ने, अवैध कब्जा, धमकी देने और बिना अनुमति निर्माण कार्य किया गया। शिकायत में बताया गया कि ऑस्ट्रेलिया निवासी मनमोहन कश्यप की उक्त संपत्ति में 7.5 प्रतिशत हिस्सेदारी और चौथी मंजिल के आधे भाग का सह-स्वामित्व था। इसका रिकॉर्ड एस्टेट ऑफिस, यूटी चंडीगढ़ में दर्ज है। 27 नवंबर 1976 को सह-मालिकों के बीच यूनाइटेड बिल्डर्स कंस्ट्रक्शन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से हुए समझौते में स्वामित्व का स्पष्ट बंटवारा किया गया था। समझौते के अनुसार चौथी मंजिल का आधा हिस्सा मनमोहन कश्यप तथा शेष आधा एक पूर्व डीजीपी की पत्नी के पास था। यह परिसर 7 अक्टूबर 2020 तक State Bank of India को किराये पर दिया गया था। वसीयत के आधार पर वारिस बने शिकायतकर्ता वर्ष 2006 में मनमोहन कश्यप और 2014 में उनकी माता कृष्णा गांदोतरा के निधन के बाद वैध वसीयत के आधार पर संपत्ति के अधिकार धर्मेंद्र कश्यप और शैलेंद्र कश्यप को प्राप्त हुए। विदेश में रहने के कारण उन्होंने पहले केयरटेकर और बाद में अमित गोयल को विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी धारक नियुक्त किया। पूरे फ्लोर पर कब्जे का आरोप विवाद उस समय गहराया जब पूर्व डीजीपी की पत्नी ने 22 नवंबर 2023 को अपनी 7.5 प्रतिशत हिस्सेदारी विक्रम सिंह को बेच दी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सीमित हिस्सेदारी खरीदने के बावजूद आरोपी ने पूरी चौथी मंजिल पर जबरन कब्जा कर लिया। आरोप के अनुसार 5 मई 2024 को विक्रम सिंह अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचा, ताले तोड़े, डुप्लीकेट चाबियां बनवाईं और केयरटेकर की अनुपस्थिति में परिसर में घुस गया। पीसीआर को बुलाया गया, लेकिन कई शिकायतों, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बावजूद उस समय एफआईआर दर्ज नहीं की गई। शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं केयरटेकर अमित गोयल ने सार्वजनिक शिकायत खिड़की पर आठ शिकायतें दीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद एनआरआई परिवार ने सीधे प्रशासक कटारिया से मुलाकात की। प्रशासक ने डीजीपी चंडीगढ़ को मामले की जांच के निर्देश दिए। इसके बाद सेक्टर-17 थाना पुलिस ने विक्रम सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 448 (आपराधिक अतिक्रमण), 454 (तोड़फोड़ कर घुसपैठ), 427 (नुकसान पहुंचाना) और 34 (सामूहिक मंशा) के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने विवादित शोरूम को सील कर दिया है।
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