कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़े चेक बाउंस मामले चंडीगढ़ कोर्ट ने हरमनप्रीत को ठहराया दोषी।
चंडीगढ़ जिला अदालत ने कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़े चेक बाउंस मामले में फैसला सुनाया है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास मोहित सिंह दबाड़ की अदालत ने हरमनजीत सिंह को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए एक साल की कैद की सजा
7.07 लाख रुपए का चेक हुआ बाउंस
कोटक महिंद्रा बैंक ने अदालत को बताया कि हरमनजीत सिंह ने बैंक से ली गई क्रेडिट सुविधा के बदले 17 फरवरी 2022 को 7,07,417 रुपये का चेक दिया था। यह चेक बैंक में जमा करने पर “ड्रॉअर सिग्नेचर डिफर” टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया था। इसके बाद बैंक की ओर से कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन आरोपी ने न तो जवाब दिया और न ही रकम का भुगतान किया।
बैंक के अनुसार, हरमनजीत सिंह ने कर्ज लेने के बाद उसकी तय शर्तों के अनुसार भुगतान नहीं किया। इसके चलते बैंक ने कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए चंडीगढ़ कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। अदालत ने सभी दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और गवाहों के बयान सुनने के बाद आरोपी को दोषी माना।
जिला अदालत चंडीगढ़।
बचाव पक्ष की दलीलें की खारिज
सुनवाई के दौरान आरोपी ने दावा किया कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था और उसने कर्ज की रकम नकद चुका दी थी। हालांकि, वह इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि बिना प्रमाण के ऐसी दलीलें स्वीकार नहीं की जा सकतीं और आरोपी कानून के तहत अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
कोर्ट ने साफ किया कि आरोपी को चेक की पूरी राशि 7,07,417 रुपये के साथ चेक की तारीख से अब तक का 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी बैंक को देना होगा। यह राशि एक महीने के भीतर अपील की अवधि समाप्त होने के बाद जमा करनी होगी।
सजा अस्थायी रूप से निलंबित, अपील का मौका
सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी की ओर से अपील दायर करने के लिए समय मांगा गया। अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 389 के तहत एक साल की सजा को अस्थायी रूप से 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है। आरोपी को 30 हजार रुपये की जमानत पर छोड़ा गया है। उसे तय समय के भीतर अपीलीय अदालत से अपना आदेश पेश करने को कहा गया है।
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