पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) में काम करने वाले मल्टी टास्किंग स्टाफ के हक में चंडीगढ़ कैट ने सुनाया फैसला।
सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) चंडीगढ़ बेंच ने एक अहम फैसला दिया है, जिससे पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) में काम करने वाले मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।
ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि अगर कोई कर्मचारी पहले अस्थायी तौर पर काम करता रहा और उसकी नौकरी बिना किसी रुकावट के बाद में पक्की हो गई, तो उस शुरुआती अस्थायी नौकरी के समय को भी वेतन बढ़ोतरी (एसीपी/एमएसीपी) के लिए जोड़ा जाएगा।
यह केस भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जुड़ा है। विभाग के दफ्तर व संस्थान हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में हैं। इस मामले में शामिल कर्मचारी भी हिमाचल प्रदेश के विभिन्न मंदिरों, किलों और उप-मंडलों में कार्यरत थे।
यह फैसला गोवर्धन लाल सहित 23 कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका पर दिया गया। सभी कर्मचारी हिमाचल प्रदेश के विभिन्न मंदिरों, किलों और उप-मंडलों में एएसआई के अंतर्गत एमटीएस के पद पर कार्यरत या सेवानिवृत्त हैं।
डीओपीटी के आदेश को किया रद्द
ट्रिब्यूनल ने डीओपीटी के 5 अप्रैल 2021 के उस कार्यालय ज्ञापन (ओएम) को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि अस्थायी सेवा को एमएसीपी के लिए नहीं जोड़ा जाएगा। CAT ने माना कि यह आदेश केवल एक प्रशासनिक स्पष्टीकरण है, जो न्यायालयों द्वारा स्थापित कानून के विपरीत है और इसलिए टिकाऊ नहीं है।
CAT ने अपने आदेश में कहा कि अस्थायी दर्जे की सेवा, जो बाद में नियमित सेवा में बदल जाती है, को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि जब एक मुद्दा पहले ही विभिन्न न्यायिक फैसलों से तय हो चुका है, तो कार्यपालिका उस पर विपरीत निर्देश जारी नहीं कर सकती।
तीन महीने में लाभ देने के आदेश
CAT ने केंद्र सरकार और एएसआई को निर्देश दिए हैं कि वे सभी याचिकाकर्ताओं की सेवा को दोबारा गणना करें, अस्थायी दर्जे की अवधि को जोड़ते हुए एमएसीपी के तहत वित्तीय उन्नयन दें और वेतन का पुनर्निर्धारण कर एरियर जारी करें। यह पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
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