श्री चिंतामन गणेश मंदिर में चैत्र मास की पारंपरिक जत्रा (मेला) 4 मार्च, बुधवार से प्रारंभ हो गई। मालवा की संस्कृति में विशेष स्थान रखने वाली इस जत्रा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस वर्ष चैत्र मास में पांच बुधवार पड़ रहे हैं, जिससे पांच जत्राओं का संयोग बन रहा है।
पंडित शंकर पुजारी के अनुसार पूजन-अभिषेक और चोला श्रृंगार के बाद सुबह 7 बजे से श्रद्धालुओं के लिए दर्शन प्रारंभ हो गए। पहली जत्रा 4 मार्च को, दूसरी 11 मार्च को, तीसरी 18 मार्च को, चौथी 25 मार्च को तथा राजसी जत्रा 1 अप्रैल को आयोजित होगी।
नई फसल अर्पित करेंगे किसान
चैत्र मास भगवान गणेश की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मालवा की कृषि परंपरा के अनुसार इस समय गेहूं की फसल पककर तैयार हो जाती है। किसान श्रद्धा भाव से अपनी नई फसल का प्रथम अंश भगवान चिंतामन गणेश को अर्पित करने मंदिर पहुंचते हैं। इसी कारण प्रत्येक बुधवार यहां मेले जैसा वातावरण रहता है, जिसे स्थानीय बोली में ‘जत्रा’ कहा जाता है।
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श्रद्धालुओं की सुविधा के विशेष इंतजाम
बढ़ती गर्मी को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। मंदिर प्रशासक अभिषेक शर्मा ने बताया कि खुले स्थानों पर शामियाने लगाए जा रहे हैं, ताकि कतार में खड़े श्रद्धालुओं को धूप से राहत मिल सके। गर्म फर्श से बचाव के लिए कारपेट बिछाए जा रहे हैं।
इसके अलावा शीतल पेयजल, पंखे और कूलर की व्यवस्था की गई है। बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाहन पार्किंग और जूता-स्टैंड के लिए विशेष काउंटर भी बनाए गए हैं। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से व्यवस्थित दर्शन करने की अपील की है।
ऐसे हो रही सजावट

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