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देश में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार हर 24 में से एक महिला को जीवनकाल में ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा है और हर वर्ष दो लाख से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं। चिंताजनक तथ्य यह है कि लगभग आधे मरीज गंभीर स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं।
यह बात एसोसिएशन ऑफ ब्रेस्ट सर्जन्स ऑफ इंडिया (ABSI) की मिड टर्म कॉन्फ्रेंस ‘मिडकॉन-2026’ के पहले दिन एसोसिएशन के नेशनल प्रेसीडेंट डॉ. डी.जी. विजय ने कही। उन्होंने बताया कि रिसर्च और दवाइयों में निरंतर सुधार हो रहा है। अब कई मामलों में पूरा ब्रेस्ट हटाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, बल्कि टार्गेटेड सर्जरी और आधुनिक तकनीकों से ब्रेस्ट को सुरक्षित रखा जा सकता है। कॉस्मेटिक सर्जरी और फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन तकनीक के जरिए कम उम्र की महिलाएं इलाज के बाद मातृत्व का सुख भी पा सकती हैं।
आयोजन समिति के चेयरपर्सन डॉ. मनीष कौशल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं तीसरी और चौथी स्टेज में डॉक्टर के पास पहुंचती हैं। वैज्ञानिक समिति के प्रमुख डॉ. दिलीप आचार्य ने बताया कि नई दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, अहमदाबाद, भोपाल, बेंगलुरु और जयपुर सहित कई शहरों से मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, सर्जन और स्त्री रोग एक्सपर्टस भी इस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए।
पद्मश्री जनक पलटा मैकगिलिगन ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कैंसर को लेकर सामाजिक दूरी और गलत धारणाएं मौजूद हैं, जिन्हें दूर करना जरूरी है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मैं एक कैंसर पीड़ित सर्वाइवर रही हूं। चार दशक पहले इलाज को लेकर काफी चुनौतियां थी। इसके साथ ही अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि अभी कैंसर के क्षेत्र में काफी अच्छे काम हो रहे हैं।
कीटनाशक, प्लास्टिक और अल्ट्रा प्रोसेस फूड पर चिंता
दिल्ली से आई ब्रेस्ट सर्जरी ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रो. नवनीत कौर ने कहा कि पिछले तीन दशकों में जागरूकता बढ़ी है और अब मरीज जल्दी जांच के लिए आ रहे हैं। हालांकि, चिंता की बात यह है कि 30 वर्ष की उम्र के युवाओं में भी ब्रेस्ट कैंसर के मामले सामने आने लगे हैं।
उन्होंने विकसित देशों में कीटनाशकों, प्लास्टिक और अल्ट्रा प्रोसेस फूड पर नियंत्रण के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि विकासशील देशों को भी पर्यावरणीय कारकों पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।
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