Bilaspur News: NTPC सीपत की राख से देवरी, कौड़िया, दररभाठा समेत 15 गांवों में शादी-ब्याह रुक रहे हैं, स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ीं. सिम्स मेडिकल कॉलेज इस पर रिसर्च करेगा. कलेक्टर ने कहा है कि नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी.
रोजमर्रा की जिंदगी में धूल और राख के बीच जीने को मजबूर
देवरी, कौड़िया, दररभाठा, जांजी, राक, हरदा, रलिया सहित दर्जनों गांव NTPC की राखड़ से प्रभावित हैं। गर्मी के मौसम में तेज हवाओं के साथ राख खेतों, घरों और सड़कों पर बिछ जाती है. हालात ऐसे हैं कि लोग रोजमर्रा की जिंदगी में धूल और राख के बीच जीने को मजबूर हैं, लेकिन अब इसका सबसे गंभीर असर सामाजिक रिश्तों पर दिखने लगा है. कई युवाओं की शादियां तय नहीं हो पा रही हैं और जिनके रिश्ते बातचीत के दौर में थे, उन्हें भी दूसरे गांवों से साफ इनकार मिल रहा है.
शादी-ब्याह से दूरी बना रहे
पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि राख के कारण सांस की तकलीफ, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं. स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि लोग अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं देख पा रहे और शादी-ब्याह से दूरी बना रहे हैं.
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सिम्स मेडिकल कॉलेज ने रिसर्च की तैयारी शुरू कर दी है. अगर अध्ययन में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम सामने आते हैं, तो इसकी रिपोर्ट पर्यावरण विभाग को भेजी जाएगी. इस मामले में कलेक्टर बिलासपुर संजय अग्रवाल का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
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