महिलाओं ने आगे बताया कि वर्तमान में उन्हें मात्र ₹1910 प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है, जो न केवल बहुत कम है बल्कि इससे ज्यादा राशि तो सरकारी काम करने में ही खर्च हो जाती है. सारा ऑनलाइन काम निजी मोबाइल से करना पड़ता है, जिसमें हर महीने ₹300–350 का रिचार्ज अनिवार्य है. इसके अलावा क्लस्टर और जनपद स्तर पर बार-बार ट्रेनिंग और मीटिंग के लिए बुलाया जाता है लेकिन यात्रा भत्ता तक नहीं दिया जाता.
महीनों तक अटका मानदेय
सखियों ने आरोप लगाया कि कई ब्लॉकों में मानदेय 4–6 महीने में एक बार दिया जाता है, वो भी सीधे बैंक खाते में नहीं बल्कि बीच-बीच में कटौती कर नकद दिया जाता है. इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति और ज्यादा खराब हो गई है. सखी संगठन की प्रांताध्यक्ष बिंदु यादव ने कहा कि बिहान योजना से रोजगार देने के दावे किए गए थे लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. उन्होंने बताया कि कुल 1910 रुपये में से ₹500 की कटौती के बाद केवल ₹1410 ही हाथ में आते हैं. जब गैस सिलेंडर ही ₹1000 में आ रहा है, तो बचे हुए पैसों में परिवार कैसे चले. उन्होंने कहा कि आज हालात ऐसे हैं कि सखियों को लगातार कर्ज लेना पड़ रहा है, फिर भी सरकार उनकी सुध नहीं ले रही.
मोबाइल से सारा काम, खर्च अपनी जेब से
बिंदु यादव ने कहा कि सारा काम मोबाइल से करना पड़ता है, जिससे हर महीने रिचार्ज का खर्च बढ़ता जा रहा है. जितना पैसा मिलता है, उससे घर का खर्च भी ठीक से नहीं चल पाता. उन्होंने सरकार से शांतिपूर्वक मांग करते हुए कहा कि मानदेय बढ़ाया जाए, भुगतान सीधे खाते में किया जाए और काम से जुड़े सभी खर्च दिए जाएं, अन्यथा प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा.
सखियों का आरोप- काम ज्यादा और वेतन कम
संगठन की प्रांताध्यक्ष ऐश्वर्या राय ने कहा कि कृषि सखी और पशु सखी महिलाओं से कई तरह के कार्य कराए जाते हैं. लखपति दीदी योजना का ऑनलाइन काम, घर-घर जाकर महिलाओं को किचन गार्डन, कृषि और पोषण से जुड़ी जानकारियां देना उनकी रोजमर्रा की जिम्मेदारी है लेकिन काम के अनुपात में वेतन नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि कई जगहों पर मानदेय घूम-फिरकर सखियों तक पहुंचता है. उन्होंने मांग की कि भुगतान हर माह सीधे बैंक खाते में किया जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किया जाएगा और सखियां काम बंद कर देंगी.
कर्मचारी का दर्जा और नियमितीकरण की मांग
कृषि सखी-पशु सखी महिलाओं ने कहा कि वे सरकार का काम करती हैं, इसलिए उन्हें कर्मचारी का दर्जा, नियुक्ति पत्र और नियमितीकरण मिलना चाहिए. साथ ही न्यूनतम वेतन अधिनियम के अनुसार मानदेय, मोबाइल भत्ता और यात्रा भत्ता दिया जाना जरूरी है.
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