बीकानेर. राजस्थान का बीकानेर अपनी भुजिया और रसगुल्लों के लिए तो दुनियाभर में मशहूर तो है ही, लेकिन अब यहां का सुपारी कारोबार भी शहर की पहचान बनता जा रहा है. स्थानीय व्यापारियों के अनुसार] भुजिया और रसगुल्ले के बाद अगर किसी खाद्य उत्पाद की सबसे ज्यादा खपत होती है तो वह सुपारी है. खास बात यह है कि यहां सुपारी उगाई नहीं जाती, बल्कि दूसरे राज्यों से कच्चे रूप में आती है और बीकानेर की जलवायु इसे खास बना देती है.
व्यापारी अनिल कुमार बोथरा ने बताया कि सुपारी मुख्यतः असम और कर्नाटक से कच्ची अवस्था में यहां पहुंचती है. बीकानेर की तेज धूप और शुष्क मौसम के कारण इसे खुले स्थानों पर फैलाकर सुखाया जाता है. यह प्रक्रिया कुछ दिनों से लेकर तीन-चार महीने तक चलती है. सुखाने के बाद सुपारी का रंग, स्वाद और बनावट बदल जाती है, जिससे इसकी बाजार में अलग पहचान बनती है.
कर्नाटक और असम से आती है कच्ची सुपारी
स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, कच्ची सुपारी की तासीर गर्म मानी जाती है, लेकिन बीकानेर में धूप में सुखाने के बाद इसे अपेक्षाकृत ठंडी तासीर वाली माना जाता है. यही वजह है कि यहां तैयार सुपारी की मांग देश के कई राज्यों और विदेशों तक रहती है. बाजार में यह “मारवाड़ी सुपारी” या “बीकानेरी सुपारी” के नाम से प्रसिद्ध है, जबकि इसका मूल उत्पादन दूसरे राज्यों में होता है. कीमत की बात करें तो गुणवत्ता के आधार पर दरें अलग-अलग होती हैं.
700 से 1600 रूपए किलो तक है सुपारी कीमत
असम से आने वाली सुपारी लगभग 700 से 800 रुपये किलो बिकती है, जबकि कर्नाटक की सुपारी 1000 से 1600 रुपये किलो तक पहुंच जाती है. व्यापारियों का कहना है कि चिकनी सुपारी की मांग सबसे ज्यादा रहती है, जो खासतौर पर मीठी सुपारी बनाने में इस्तेमाल होती है. इसकी मासिक खपत करीब 300 टन तक बताई जाती है. सुपारी का कारोबार मौसम पर भी निर्भर करता है. असम से आने वाली खेप जनवरी से अप्रैल के बीच ज्यादा आती है, जबकि कर्नाटक की सुपारी का सीजन जून-जुलाई और दिसंबर-जनवरी में रहता है.
600 से 700 लोगों को रोजगार मिल रहा है
व्यापार में कर्नाटक की सुपारी को कई बार मुंबई सुपारी के नाम से भी जाना जाता है, जो व्यापारिक पहचान का हिस्सा बन चुका है. बीकानेर शहर के परकोटे के अंदर कई बाजार सुपारी व्यापार के प्रमुख केंद्र हैं, जहां पीढ़ियों से यह काम चल रहा है. मोहता चौक, बड़ा बाजार, कोटगेट, फड़ बाजार और रेलवे स्टेशन क्षेत्र में दर्जनों दुकानें इस कारोबार से जुड़ी हैं. सुपारी को सुखाने, काटने, पॉलिश करने और पैकिंग जैसे कामों में करीब 600 से 700 लोगों को रोजगार मिल रहा है.
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