सेना के अधिकारियों के मुताबिक यह अभ्यास सिर्फ ताकत दिखाने के लिए नहीं है, बल्कि बदलते युद्ध के तरीके को जमीन पर परखने की कोशिश है. अब बड़े जमावड़े की जगह तेज, सटीक और नेटवर्क से जुड़े ऑपरेशन पर जोर दिया जा रहा है. ‘मास मोबिलाइजेशन’ से आगे बढ़कर ‘साइलेंट प्रिसिजन’ की दिशा में सेना काम कर रही है. ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों के बाद इस नई सोच को और मजबूत किया गया है.
आज के मुख्य चरण में पश्चिमी कमान के कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर की अगुवाई में बड़ा प्रदर्शन हुआ. आर्टिलरी फायर, एयरबोर्न ऑपरेशन और संयुक्त युद्धाभ्यास के जरिए असली युद्ध जैसी स्थिति बनाई गई. हेलीकॉप्टर और जमीनी सेना के बीच तालमेल दिखाया गया.
अभ्यास में चेतक हेलीकॉप्टर, Mi-18, अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और एएलएच रुद्र हेलीकॉप्टर ने हिस्सा लिया. हवाई प्लेटफॉर्म और जमीनी बलों के बीच सीधा संपर्क और तालमेल दिखाया गया. यह पूरा अभ्यास नेटवर्क आधारित युद्ध की सोच को सामने लाता है, जहां हर यूनिट एक दूसरे से जुड़ी रहती है और तुरंत प्रतिक्रिया देती है.
ड्रोन, टैंक और नाइट फायरिंग की तैयारी
खड़ग शक्ति 2026 में ड्रोन टेक्नोलॉजी को खास जगह दी गई. लॉजिस्टिक ड्रोन ने करीब 200 किलोग्राम तक वजन उठाकर दिखाया कि भविष्य में सप्लाई सिस्टम कैसे बदलेगा. स्वान ड्रोन, खड्गा ड्रोन और सेना द्वारा विकसित ‘ऐरावत’ ड्रोन का भी प्रदर्शन किया गया. निगरानी, लक्ष्य पहचान और हमला करने की क्षमता के साथ साथ काउंटर यूएवी रणनीति पर भी सैनिकों को ट्रेनिंग दी गई.
चक्रव्यूह निर्माण और ड्रोन आधारित रणनीति भी इस अभ्यास का अहम हिस्सा रही. सैनिकों को सिखाया गया कि ड्रोन हमलों से कैसे बचाव करना है और जवाबी कार्रवाई कैसे करनी है. टैंक, मिसाइल और भारी तोपों की गूंज से रेंज कांपती नजर आई. बख्तरबंद और यंत्रीकृत इकाइयों ने स्ट्राइक कोर की ताकत दिखाई.
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