बिहार के आरा में शिक्षा जगत से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। विश्वविख्यात गणितज्ञ स्वर्गीय डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह को जीवन का पहला पाठ पढ़ाने वाले उनके शिक्षा गुरु शिवनाथ सिंह का 91 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने पटना के राजेंद्र नगर स्थित अपने आवास ‘शिव दर्शन कुटीर’ में अंतिम सांस ली। निधन की खबर मिलते ही न सिर्फ बिहार, बल्कि पूरे देश के शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। गुरु-शिष्य परंपरा के उस मजबूत स्तंभ का यूं चला जाना शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। पूरा जीवन शिक्षा को समर्पित था शिवनाथ सिंह, जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक ‘गुरु जी’ कहकर संबोधित करते थे। इनका जन्म भोजपुर के उदवंतनगर प्रखंड अंतर्गत सरथुआ गांव में हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा को समर्पित कर दिया। आरा सदर प्रखंड के बसंतपुर गांव स्थित प्राइमरी स्कूल में उन्होंने सालों तक शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं। यही वह विद्यालय है, जहां से आगे चलकर विश्व पटल पर बिहार का नाम रोशन करने वाले महान गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह की शिक्षा यात्रा शुरू हुई थी। शिष्य विश्व के श्रेष्ठ गणितज्ञों में शामिल बाल्यावस्था में शिवनाथ सिंह ने ही वशिष्ठ नारायण सिंह को उंगली पकड़कर अक्षर ज्ञान कराया था। उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए वे उन्हें अन्य छात्रों से अलग मानते थे और विशेष स्नेह, मार्गदर्शन और प्रेरणा देते थे। गुरु की वही दूरदृष्टि आगे चलकर इतिहास में दर्ज हो गई, जब उनका शिष्य विश्व के श्रेष्ठ गणितज्ञों में शामिल हुआ। निधन की सूचना मिलते ही पटना स्थित उनके आवास पर शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और गणमान्य लोगों का तांता लग गया। हर आंख नम थी और हर जुबान पर एक ही बात—शिक्षा का एक उज्ज्वल प्रकाश आज बुझ गया। श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे लोगों ने कहा कि जिन्होंने विश्वस्तरीय गणितज्ञ को पहला ज्ञान दिया, ऐसे निस्वार्थ और आदर्श गुरु का जाना शिक्षा जगत के लिए कभी न भरने वाला शून्य छोड़ गया है। भले ही शिवनाथ सिंह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आरा के बसंतपुर प्राइमरी स्कूल से लेकर वैश्विक पहचान तक की नींव रखने वाले इस महान गुरु का योगदान सदैव अमर रहेगा। उनकी ओर से बोया गया ज्ञान का बीज आज भी पूरी दुनिया को रोशन कर रहा है, और गुरु-शिष्य का यह पवित्र संबंध इतिहास में हमेशा जीवित रहेगा।
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