दिग्विजय सिंह क्यों नहीं जाएंगे राज्यसभा
2028 चुनाव में भी 2018 वाला फॉर्मूला
दिग्विजय की जगह राज्यसभा में कौन?
इस बीच दिग्विजय सिंह के फैसले के बाद कांग्रेस के भीतर सामाजिक संतुलन की बहस भी तेज हो गई है. अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने खुलकर मांग रखी है कि राज्यसभा में इस बार दलित समाज को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. उनका तर्क है कि मध्य प्रदेश की करीब 17 फीसदी अनुसूचित जाति आबादी की यह लंबे समय से अपेक्षा रही है. हालांकि इस मांग पर दिग्विजय सिंह ने साफ कर दिया कि टिकट का फैसला उनके हाथ में नहीं है, लेकिन यह जरूर तय है कि वे अपनी सीट खाली कर रहे हैं.
रेस में सबसे आगे कौन?
- कमलनाथ: पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरों में से एक. चर्चा है कि वे एक बार फिर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका चाहते हैं. यदि उन्होंने दावेदारी ठोकी, तो बाकी नामों की राह मुश्किल हो सकती है.
- जीतू पटवारी: मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष. आक्रामक तेवर, विधानसभा में सक्रिय भूमिका और संगठनात्मक पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है.
- अरुण यादव: पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व पीसीसी चीफ. संगठन और दिल्ली दोनों में उनकी स्वीकार्यता है.
- अजय सिंह (राहुल भैया): पूर्व नेता प्रतिपक्ष, जो लंबे समय से किसी बड़ी जिम्मेदारी की प्रतीक्षा में हैं.
कमलनाथ की कैसी दावेदारी?
दिग्विजय सिंह के हटने के साथ ही कांग्रेस की एकमात्र सुरक्षित मानी जा रही राज्यसभा सीट अब सियासी मुकाबले का केंद्र बन गई है. पार्टी के भीतर कई बड़े नामों की चर्चा शुरू हो चुकी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दिल्ली में लॉबिंग और समीकरण तेज होंगे. सबसे चर्चित नाम पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का है. समय-समय पर यह संकेत मिलते रहे हैं कि वे एक बार फिर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के इच्छुक हैं. अगर कमलनाथ राज्यसभा की रेस में उतरते हैं, तो उनके राजनीतिक कद और अनुभव के चलते बाकी दावेदारों की राह आसान नहीं रहेगी.
इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का नाम भी मजबूती से उभर रहा है. विधानसभा में मुखर भूमिका, सड़क से सदन तक सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख और संगठन पर पकड़ उन्हें युवा नेतृत्व के चेहरे के तौर पर पेश करती है. पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व पीसीसी चीफ अरुण यादव भी इस दौड़ में शामिल माने जा रहे हैं, जबकि पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के नाम पर भी चर्चा है, जो लंबे समय से किसी बड़ी जिम्मेदारी की प्रतीक्षा में बताए जाते हैं.
एमपी से राज्यसभा की कितनी सीटें?
राज्यसभा के गणित की बात करें तो मध्य प्रदेश में कुल 11 सीटें हैं, जिनमें से आठ पर भाजपा और तीन पर कांग्रेस का कब्जा है. 2026 में तीन सीटें खाली हो रही हैं, लेकिन मौजूदा संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस के लिए फिलहाल सिर्फ एक सीट ही सुरक्षित मानी जा रही है. ऐसे में दावेदारी की लड़ाई और भी दिलचस्प हो गई है, क्योंकि हर बड़ा नेता जानता है कि मौका एक ही है और दावेदार कई.
राज्यसभा में अपने कार्यकाल के दौरान दिग्विजय सिंह भाजपा और आरएसएस के खिलाफ वैचारिक हमलों के लिए जाने जाते रहे हैं. उनकी मुखरता ने उन्हें सेक्युलर और प्रगतिशील तबकों में लोकप्रिय बनाया, लेकिन साथ ही वे कई विवादों के केंद्र में भी रहे. हाल के दिनों में जब उन्होंने भाजपा-आरएसएस के संगठनात्मक ढांचे की तारीफ की और कांग्रेस में विकेंद्रीकरण की जरूरत बताई, तो सियासी हलकों में इसे भी उनके नए रोल की भूमिका के तौर पर देखा गया.
कुल मिलाकर, दिग्विजय सिंह का राज्यसभा से हटना कांग्रेस की बदलती रणनीति, पीढ़ीगत बदलाव और मध्य प्रदेश में संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस नेतृत्व इस खाली होने वाली सीट पर किसे मौका देता है और क्या यह फैसला पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा.
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