Bhopal News: बलदेव वाघमरे के परिवार के सदस्य सूर्यकांत ने लोकल 18 से कहा कि इस कंगन को मोल्ड करके अलग तरह से बनाया गया है. इसके डिजाइन को अलग-अलग कास्ट करने के बाद मेटल बिल्डिंग की मदद से जोड़ा गया है.
बैतूल की जीआई टैग कला के लिए राष्ट्रपति के हाथों नेशनल हैंडीक्राफ्ट अवॉर्ड अपने नाम करने ट्राइबल आर्टिस्ट बलदेव वाघमरे ने अपनी जनजाति के रहन-सहन से लेकर पहनावे, खानपान और संस्कृति को 25 किलो के पीतल के कंगन पर अपने हाथों से बनाया है.
अनोखे कंगन में जनजाति जीवन के हर रंग
भरेवा जनजाति की झलक दिखाता यह अनोखा कंगन इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें हाथों की इतनी अनोखी कलाकारी झलक रही है, जिसको बनाना हर किसी के बस की बात नहीं है. इस 25 किलो वजनी कंगन में भरेवा शिल्प कला में माहिर बलदेव वाघमरे ने बैतूल में रहने वाली भरेवा जनजाति के जीवन के हर रंग को कंगन पर उतारा है.
कंगन बनाने में लगा एक महीने का वक्त
जनजाति जीवन को दिखाते इस कंगन को लेकर बात करते हुए बलदेव वाघमरे के परिवार के सदस्य सूर्यकांत लोकल 18 को बताते हैं कि इस कंगन को मोल्ड करके अलग तरह से बनाया गया है. जिसके बाद फिर इसके डिजाइन को अलग-अलग कास्ट करके फिर मेटल बिल्डिंग की मदद से जोड़ा गया है. इसको बनाने वाले बलदेव वाघमरे को लेकर सूर्यकांत बताते हैं कि वह उनके मामा लगते हैं और उनको भरेवा जनजाति की शिल्पकला बनाते हुए 20 सालों से ज्यादा का समय हो गया है. उनकी कलाकारी की वजह से ही बैतूल में हमारे गांव का नाम भी क्राफ्ट विलेज टिगरिया रखा गया है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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