बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले की सीमा पर स्थित बेणेश्वर धाम पर आदिवासियों के महाकुंभ कहे जाने वाले प्रसिद्ध बेणेश्वर मेले का गुरुवार को विधिवत शुभारंभ हो गया। बेणेश्वर धाम के पीठाधीश्वर महंत अच्युतानंद महाराज ने राधा-कृष्ण मंदिर पर सप्तरंगी ध्वजा फहराकर मेले का आगाज किया। मेले का मुख्य आयोजन माघ पूर्णिमा के दिन 1 फरवरी को होगा, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के बेणेश्वर धाम पहुंचने की संभावना है।
सोम, माही और जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित बेणेश्वर धाम में महंत अच्युतानंद महाराज ने राधा-कृष्ण मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद आम्र पल्लव से सुसज्जित सतरंगी ध्वजा की पूजा कर ढोल-नगाड़ों और संत मावजी महाराज की आगलवाणियों के बीच मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण किया गया। ध्वजारोहण के साथ ही संत मावजी महाराज के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा और बेणेश्वर मेले का औपचारिक शुभारंभ हुआ।
मेले के पहले ही दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। साबला, वालाई और बेणेश्वर धाम की पुलिया पर हजारों श्रद्धालुओं की रेलमपेल रही। धाम स्थित राधा-कृष्ण मंदिर, शिव मंदिर, ब्रह्माजी मंदिर और वाल्मीकि मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें नजर आईं। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने मेले में लगे झूलों और अन्य मनोरंजन साधनों का आनंद लिया।
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