Barmer Marudhar News : बाड़मेर में राज सखी मेला महिलाओं के हुनर, आत्मनिर्भरता और संस्कृति का उत्सव है, जिसमें प्रदेशभर से आई 50 स्टॉल और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र बनी हैं. राज सखी मेले में प्रवेश करते ही रंग बिरंगी स्टॉल, पारंपरिक सजावट और लोक संगीत की मधुर धुनें आगंतुकों का स्वागत करती हैं. एक सप्ताह तक चलने वाला यह मेला इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
राज सखी मेले में प्रवेश करते ही रंग बिरंगी स्टॉल, पारंपरिक सजावट और लोक संगीत की मधुर धुनें आगंतुकों का स्वागत करती हैं. एक सप्ताह तक चलने वाला यह मेला इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. प्रदेशभर से आई सखियां यहां अपने हुनर, कला और परंपराओं की छटा बिखेर रही हैं. मेले में हस्तशिल्प, पारंपरिक परिधान, लोक आभूषण, गृह सज्जा सामग्री और स्वदेशी उत्पादों की विभिन्न स्टॉल लगाई गई हैं. महिला स्व सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को विशेष पहचान मिल रही है.
खरीदारी के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
मेले में केवल खरीदारी ही नहीं बल्कि लोकगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हर शाम उत्सव जैसा माहौल बना रहता है. यहां ग्रामीण संस्कृति की झलक के साथ आधुनिक सोच का समन्वय देखने को मिल रहा है. राज सखी मेला महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जहां हुनर को मंच और सपनों को नई उड़ान मिलती है. राजीविका के जिला परियोजना प्रबंधक नरपतसिंह भाटी ने बताया कि इन स्टॉल के माध्यम से महिलाओं को अपने कौशल को प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया है.
इस राज सखी मेले में बाड़मेर के साथ बालोतरा, जोधपुर, राजसमंद, अलवर, नागौर और जालौर सहित प्रदेशभर से स्वयं सहायता समूहों की लगभग 50 स्टॉल लगाई गई हैं. जिला परियोजना प्रबंधक नरपतसिंह भाटी के अनुसार मेले का उद्देश्य केवल उत्पादों की बिक्री नहीं बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनके हुनर को पहचान दिलाना है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से आई महिलाएं अपने पारंपरिक कौशल को आधुनिक बाजार से जोड़ रही हैं. इससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है और उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हो रहा है.
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