Barmer Farmer Son Success Story: बाड़मेर के छोटे से गांव बिस्सू खुर्द से निकले किशोर खीमावत ने संघर्ष और मेहनत की मिसाल पेश की है. बैलगाड़ी चलाकर मजदूरी करने वाले पिता का सपना आखिरकार बेटे की वर्दी में साकार हुआ. सीमित संसाधन, आर्थिक तंगी और 30 किलोमीटर दूर जाकर पढ़ाई करने के बावजूद किशोर ने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में पुलिस कॉन्स्टेबल बनकर परिवार का नाम रोशन किया.
जिस पिता ने जीवन भर बैलगाड़ी चलाकर मजदूरी की उसका सपना था कि बेटा पढ़-लिखकर समाज में सम्मान पाए. आज वही सपना किशोर खीमावत की वर्दी में साकार हुआ है. किशोर के पिता कुंभाराम किसान और मजदूर हैं, जिन्होंने जीवनभर बैलगाड़ी पर मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण किया. कुंभाराम को पढ़ाई का मौका नहीं मिला, लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि उसका बेटा पढ़ेगा और अफसर बनेगा. सीमित संसाधनों, आर्थिक तंगी और ग्रामीण हालात के बावजूद किशोर ने हार नहीं मानी और कठिन मेहनत और लग्न से उसने कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की है.
रोजाना 30 किमी दूर बस से जाना पड़ता था विद्यालय
गांव में पढ़ाई की सुविधा नहीं होने के कारण किशोर को रोज़ाना 30 किलोमीटर दूर बाड़मेर के भियाड़ जाकर पढ़ना पड़ता था. इसके लिए किशोर को बस से सफर करना पड़ता था. 9 भाई-बहनों में सबसे छोटे किशोर ने बाड़मेर शहर में मेघवाल समाज की हॉस्टल में रहकर पुलिस कॉन्स्टेबल की तैयारी की और दूसरे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की है.
दूसरे प्रयास में मिली सफलता
किशोर लोकल 18 से अपने संघर्ष की कहानी बयां करते हुए कहते है कि उनके पिता ने बैलगाड़ी चलाकर उन्हें और उनके परिवार का गुजर बसर चलाया है. पिता निरक्षर होने के बावजूद वे चाहते थे कि उनका बेटा पढ़कर एक अफसर बने और इसी संघर्ष को किशोर कुमार ने अपनी जिद्द बना लिया था. दूसरे प्रयास में किशोर का बहरोड़-कोटपूतली पुलिस में कॉन्स्टेबल पद पर चयन हुआ है.
मोबाइल रिजार्च करने के नहीं रहते थे पैसे
किशोर बताते है कि उनके परिवार की माली हालत ठीक नहीं होने की वजह से वे मोबाइल से भी दूरी बनाकर रखते थे. वे बताते है कि हालत ऐसी है कि आज भी उनके फोन में रिचार्ज नहीं किया हुआ है. वे बताते हैं कि रिजल्ट आने के बाद दोस्त के फोन से ही घरवालों को बधाई दी तो उनकी आंखों में आंसू झलक पड़े.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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