बांसवाड़ा जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामसुरेश प्रसाद ने साढ़े पांच वर्ष पुराने दुष्कर्म के एक मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी को दोष सिद्ध होने पर 10 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला वर्ष 2020 का है। पुलिस थाना खमेरा में पीड़िता ने एक 30 सितंबर 2020 को लिखित रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया कि 28 सितंबर को वह अपनी बहन के साथ बड़ी बहन के घर जाने के लिए गांव के बस स्टैंड पर खड़ी थी। इसी दौरान रमणलाल पिता गेबीलाल निवासी विलवावाड़ा वहां आया। उससे बात नहीं करने की बात कहते हुए उसने मारपीट आरंभ कर दी। बीच-बचाव करने पर बहन को पत्थर लेकर मारने दौड़ा।
इसके बाद बहन घटना की इत्तला देने घर की ओर गई। लेकिन आरोपी उसे जबरन अपने घर की ओर ले गया। वहां आम के पेड़ से बांध दिया। इसके बाद उसने रात में उससे दुष्कर्म किया। अगले दिन आरोपी के पिता और अन्य परिजन आए तथा उसे रमणलाल के पक्ष में बयान दिलाने के लिए खमेरा थाने ले गए। इसी दौरान वहां पीड़िता के पिता भी रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे थे। पिता ने पीड़िता को साथ ले जाने को कहा तो इनकार किया। पिता ने अन्य परिजनों को बुलाया और पीड़िता को लेकर घर पहुंचे। वहां पीड़िता ने घटनाक्रम की जानकारी दी।
13 जनों ने दी गवाही
रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। जांच के दौरान आरोपी रमणलाल को गिरफ्तार किया। अनुसंधान के बाद न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। लोक अभियोजक योगेश सोमपुरा ने बताया कि न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह व 28 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए गए। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 366, 323, 342 तथा 376 का दोषी माना। न्यायालय ने आरोपी रमणलाल को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।
पीड़िता को दी राहत
न्यायालय ने पीड़ित प्रतिकर स्कीम 2011 के तहत पीड़िता को राहत देते हुए अनुशंसा की। पीड़िता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राशि निर्धारित की जाएगी। यदि पूर्व में पीड़िता को कोई राशि दी गई होगी तो वह निर्धारित की गई राशि में समायोजित की जाएगी।
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