आज भी गांव-कस्बों के लोग सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं और जब कभी सरकारी इंजीनियर या ठेकेदार विकास का चोला ओढ़कर गांव पहुंचते हैं तो वहां भी लूट-खसोट का खेल शुरू हो जाता है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला बालोतरा जिले में सामने आया है, जहां ग्रामीणों का वर्षों का इंतजार एक रात की हेराफेरी में बदल गया।
पहली बार बनी सड़क लेकिन कुछ ही घंटों में भरोसा टूटा
जिले की चांदेसरा ग्राम पंचायत से सोमेसरा तक करीब दो किलोमीटर लंबे रास्ते पर आजादी के बाद पहली बार सड़क निर्माण शुरू हुआ। गांव वालों को उम्मीद थी कि अब बच्चों को स्कूल, किसानों को मंडी और मरीजों को अस्पताल पहुंचने में आसानी होगी लेकिन यह खुशी कुछ ही घंटों की मेहमान निकली। रात करीब 10 बजे के बाद शुरू हुआ निर्माण कार्य अगले ही दिन सुबह ग्रामीणों के गुस्से का कारण बन गया। सुबह जब लोग नई बनी सड़क को देखने पहुंचे तो जो नजारा सामने आया उसने सबको हक्का-बक्का कर दिया। सड़क पर बिछी डामर की परत हाथों से ही उखड़ रही थी।
इस संबंध में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि एक युवक सड़क की डामर परत को बिना किसी औजार के सिर्फ हाथों से खुरचकर उखाड़ देता है। इतना ही नहीं इस डामर की परत के नीचे ठोस बेस लेयर के बजाय रेत और मिट्टी फैली हुई दिखाई दे रही है। यानी रात के अंधेरे में विकास के नाम पर खानापूर्ति करके पैसा बटोर लिया गया।
गांववालों का आरोप है कि सड़क निर्माण जान-बूझकर रात में कराया गया ताकि गड़बड़ी किसी की नजर में न आए। निर्माण के दौरान न काम की निगरानी के लिए कोई सरकारी इंजीनियर मौजूद था, न किसी अधिकारी ने गुणवत्ता जांचने की जहमत उठाई। ग्रामीणों ने बताया कि रेत पर डामर डालते समय तापमान का भी ध्यान नहीं रखा गया, जिसके कारण सड़क सुबह की ठंडक में जमने के बजाय बिखर गई।
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मामले का वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोग ठेकेदार, निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह वीडियो सामने नहीं आता तो यह भ्रष्टाचार आने वाले वर्षों तक दबा रहता और दोषियों की जेबें भरी रहतीं।
फिलहाल संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
हालांकि वायरल वीडियो और बढ़ते जनदबाव को देखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि इस मामले में जांच बैठाई जाएगी लेकिन लोगों को इस बात की चिंता है कि जांच कहीं सिर्फ औपचारिकता बनकर न रह जाए।
बालोतरा की यह घटना सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि व्यवस्था की जर्जर हकीकत का आईना है। देशभर में गांवों के विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन जमीन पर नतीजा सिर्फ टूटी सड़कें, अधूरे काम और झूठे वादे ही दिखते हैं।
यदि यही हाल रहा तो विकास योजनाएं सिर्फ फाइलों में और जनता की उम्मीदें धूल और डामर के नीचे दबी रह जाएंगी।
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