Bageshwar Wrestling Competition 2026: बागेश्वर के सरयू घाट पर इस जनवरी में होने वाला विशाल दंगल दर्शकों को रोमांच और संस्कृति का अनूठा संगम दिखाएगा. देश के छह राज्यों और नेपाल के पहलवान यहां अपनी ताकत और कुश्ती कौशल का प्रदर्शन करेंगे. पुरुषों के साथ महिला पहलवानों की भागीदारी इसे और खास बनाएगी. तीन दिन तक चलने वाले इस आयोजन में पारंपरिक अखाड़ा कुश्ती और आधुनिक नियमों के मुकाबले दोनों देखने को मिलेंगे.
बागेश्वर में 19 जनवरी से सरयू नदी के पावन तट पर विशाल दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है. यह आयोजन उत्तरायणी मेले से पहले बागेश्वर की पारंपरिक खेल संस्कृति को जीवंत करेगा. नदी किनारे मिट्टी से तैयार अखाड़े में पहलवानों की कुश्ती दर्शकों को पुराने समय के दंगल की याद दिलाएगी. ढोल-दमाऊं की थाप और दर्शकों के उत्साह के बीच पहलवान दमखम दिखाएंगे. आयोजकों का कहना है कि सरयू तट पर दंगल का आयोजन धार्मिक, सांस्कृतिक और खेल परंपराओं का अनूठा संगम होगा, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचेंगे.

इस विशाल दंगल की खास बात यह है कि इसमें देश के छह राज्यों के साथ पड़ोसी देश नेपाल से भी पहलवान हिस्सा लेंगे। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड और नेपाल के प्रसिद्ध अखाड़ों से जुड़े पहलवान अपनी ताकत और तकनीक का प्रदर्शन करेंगे. पुरुषों के साथ-साथ महिला पहलवानों की भागीदारी भी इस आयोजन को खास बनाएगी. अलग-अलग राज्यों की कुश्ती शैली देखने को मिलेगी, जिससे मुकाबले और भी रोचक होंगे. प्रायोजक दिलिप खेतवाल ने बताया कि कई राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके पहलवान भी दंगल में उतरेंगे, जिससे दर्शकों को उच्चस्तरीय कुश्ती देखने का मौका मिलेगा.

दंगल प्रतियोगिता तीन दिनों तक चलेगी, जिसमें प्रतिदिन अलग-अलग वर्गों के मुकाबले आयोजित किए जाएंगे. पहले दिन स्थानीय और उभरते पहलवानों को मौका दिया जाएगा, जबकि अगले दिनों में बड़े और चर्चित मुकाबले होंगें. पारंपरिक अखाड़ा कुश्ती के साथ-साथ आधुनिक नियमों के तहत भी कुश्ती कराई जाएगी. इससे युवा पीढ़ी को आधुनिक खेल नियमों की जानकारी मिलेगी और बुजुर्गों को पारंपरिक कुश्ती का आनंद. आयोजकों ने समय सारिणी तैयार कर ली है, ताकि दर्शकों को पूरे दिन भर रोमांचक मुकाबले देखने को मिल सकें.
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इस बार बागेश्वर के दंगल में महिला पहलवानों की भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी. उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों की महिला पहलवान अखाड़े में उतरकर अपनी ताकत और कौशल का प्रदर्शन करेंगी. महिला पहलवानों की कुश्ती से समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक संदेश जाएगा. यह दंगल महिलाओं को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा. दर्शकों में भी महिला मुकाबलों को लेकर खास उत्सुकता है. इससे यह साबित होगा कि कुश्ती जैसे पारंपरिक खेल में भी महिलाएं पुरुषों से कम नहीं हैं.

आयोजकों और प्रशासन ने दंगल स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती की जाएगी. साथ ही चिकित्सा सुविधा, पेयजल और बैठने की उचित व्यवस्था की गई है. अखाड़े के चारों ओर बैरिकेडिंग की जाएगी, ताकि दर्शक सुरक्षित दूरी से मुकाबले देख सकें. परिवार के साथ आने वाले दर्शकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विशेष ध्यान रखा जा रहा है. साफ-सफाई और यातायात प्रबंधन पर भी जोर दिया गया है.

विशाल दंगल प्रतियोगिता से बागेश्वर के पर्यटन को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है. दंगल देखने के लिए आसपास के जिलों के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी पर्यटक पहुंचेंगे. इससे होटल, ढाबे, टैक्सी और स्थानीय दुकानदारों की आमदनी बढ़ेगी. उत्तरायणी मेले से पहले इस तरह का आयोजन बागेश्वर की पहचान को और मजबूत करेगा. सरयू घाट, बागनाथ मंदिर और अन्य दर्शनीय स्थलों पर भी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी. स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे आयोजन क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाते हैं.

दंगल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना है. आज के समय में जब युवा मोबाइल और टीवी तक सीमित होते जा रहे हैं, ऐसे आयोजनों से उन्हें शारीरिक खेलों की ओर आकर्षित किया जा सकता है. कुश्ती जैसे खेल से अनुशासन, ताकत और आत्मविश्वास विकसित होता है. स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों को दंगल देखने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है. इससे भविष्य में बागेश्वर और आसपास के क्षेत्रों से नए प्रतिभाशाली पहलवान उभर सकते हैं.

उत्तरायणी मेला बागेश्वर की पहचान है और उससे पहले आयोजित होने वाला यह दंगल सांस्कृतिक माहौल को और रंगीन बना देगा. दंगल के दौरान लोक संगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्र और पहाड़ी संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी. यह आयोजन केवल खेल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बागेश्वर की परंपरा और विरासत को भी सामने लाएगा. आने वाले वर्षों में इस दंगल को और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा. इससे बागेश्वर को राष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती के बड़े केंद्र के रूप में पहचान मिल सकती है.
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