वैशाली के अरुण कुमार ने सुमेरगंज में हाइड्रोपोनिक तकनीक से बिना मिट्टी के छत पर सब्जियां उगाईं हैं, जैविक खाद और घरेलू जुगाड़ के साथ की कई खेती की किसानों को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं.
वैशाली जिले के चेहरा कलां प्रखंड के सुमेरगंज गांव के एक युवक ने खेती के नए तरीके अपनाएं हैं. बगैर मिट्टी के पौधे उगाने की तकनीक से वह न सिर्फ भरपूर पैदावार पा रहा है, बल्कि अन्य किसानों को भी इसके लिए ट्रेनिंग दे रहा है. इनकी तकनीक फसल उगाने की एक ऐसी तकनीक है जिसमें मिट्टी का उपयोग किए बिना पौधों को उगाया जाता है. पौधे पोषक तत्वों से युक्त पानी के घोल में उगाए जाते हैं. पौधों की जड़ों को सीधे पानी में रखा जाता है जिससे उन्हें आवश्यक पोषक तत्व और ऑक्सीजन मिलता रहता है. खेती की इस तकनीक में किसान बिना मिट्टी के फसल उगा कर जीरो लागत में बेहतर उत्पादन कर सकते हैं. सुमेरगंज के अरुण कुमार ने दो साल पहले मोबाइल पर वीडियो देखने के दौरान मनी प्लांट से इस तरह के पौधे लगाने की प्रेरणा ली. सोचा कि मनी प्लांट पानी से पोषक तत्त्व लेकर विकसित हो सकता तो अन्य पौधे क्यों नहीं.
घर की छत उगा रहा सब्जी
अरुण ने बताया कि उसने पीवीसी पाइप के एक छोटे टुकड़े को लेकर उसमें कई छेद बनाकर चार-पांच सब्जी के पौधे को लगाया. पानी के माध्यम से उसमें प्राकृतिक खाद आदि दिया. पौधे का विकास काफी तेजी से हुआ. कम समय में ही पौधे में पूरे साल उगा सकते हैं हरी सब्जी और अन्य फसलें घरेलू विधि से अरुण कुमार ने छत पर बैंगन, पालक, मिर्च, खीरा, गोभी, राजमा, सेम, टमाटर, चना, मटर, धनिया आदि की फसल लगा रखी है. अरुण इस तकनीक के संबंध में किसानों को जानकारी देकर इस विधि से खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. खासकर शहरी लोगों को अपने छत पर इस तकनीक से खेती कर ताजी सब्जी उगा सकते हैं. जनसंख्या बढ़ने के साथ ही कम होती कृषि भूमि के लिए विकल्प के तौर पर इस तकनीक को अपनाया जा सकता है. फलन भी शुरू हो गया. इस तकनीक में गूगल के माध्यम से इजरायल में होने वाली बागवानी की तकनीक को भी शामिल किया है.
अपनाते हैं ये तरीका
अरुण कुमार बताते हैं कि आठ-दस इंच मोटा पीवीसी पाइप लेते हैं. इसमें दो इंच व्यास का छेदकर सभी पाइप को एक दूसरे से कनेक्ट करते हैं. इनमें छोटे मोटर की मदद से पानी की सप्लाई की जाती है. पाइप में बने छेद में प्लास्टिक के छोटे-छोटे गिलास में कोकपीट (नारियल छिलका का डस्ट) डालकर शिशु पौधे लगाए जाते हैं. पौधों की जड़ तक पानी पहुंचाने के लिए ग्लास के नीचे सूती कपड़े की बत्ती लगाई जाती है, इसमें रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद के रूप में हल्दी पाउडर व सरसों की खल्ली का प्रयोग कर रहे हैं. सबसे आश्चर्य है कि यह खेती आप कोर्ट पैंट पहनकर कर सकते है…
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