अमर उजाला ने उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में अपनी 29 वर्षों की यात्रा पूरी की है। इन वर्षों में अमर उजाला ने नए राज्य के लिए संघर्ष को बहुत करीब से देखा और समाज की नब्ज को समझते हुए उसे अमिट शब्द दिए। राज्य गठन के पहले और बाद की विकास यात्रा में अमर उजाला सहयात्री की भूमिका में हमेशा नजर आया है। राज्य के जनसरोकारों, संस्कृति से जुड़ाव, आपके विश्वास और प्रतिबद्धता का उत्सव है 29 वर्षों की यात्रा।
न सिर्फ संघर्ष बल्कि राज्य के युवाओं, महिलाओं और सैन्य प्रदेश के सपने और बदलाव का साक्षी रहा अमर उजाला। यह यात्रा हमारी नहीं, आप सबकी है। बीते 29 वर्षों में तकनीक बदली, पत्रकारिता का स्वरूप बदला लेकिन गौरवशाली सफर में पाठकों का अटूट विश्वास स्थिर रहा है।
अमर उजाला बीते वर्षों में कभी मार्गदर्शक बनकर, कभी बुलंद आवाज बनकर तो कभी परिवार के सदस्य के तौर आपके सुख-दुख में खड़ा दिखा है। इस दौरान पीढि़यां बदलीं, पहाड़ों का स्वरूप बदला लेकिन लगातार आप सुधि पाठकों का भरोसा नहीं बदला। अमर उजाला देहरादून से प्रकाशित होने वाले गढ़वाल के आठ संस्करणों के माध्यम से गांवों, छोटे कस्बों, शहरों में रहने वाले लोगों के बीच हमारा आत्मीय जुड़ाव हर सुबह का है।
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