Ramadan 2026: रहमतों और बरकतों का पाक महीना रमजान उल-मुबारक शुरू होते ही मुस्लिम समुदाय में रूहानी माहौल देखने को मिल रहा है. रोजेदार पूरे समर्पण के साथ रोजा रखकर इबादत में जुट गए हैं. इस पवित्र महीने में लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल जाती है—सुबह से रात तक इबादत, नमाज और नेक कामों में समय बिताया जाता है.
रमजान का यह महीना विशेष रूप से महिलाओं के लिए दोहरी जिम्मेदारी लेकर आता है. वे न केवल पूरी शिद्दत के साथ इबादत और तिलावत में समय बिताती हैं, बल्कि घर-परिवार की देखभाल और सहरी व इफ्तार की तैयारियों में भी सक्रिय रहती हैं. मस्जिदों में पांच वक्त की नमाज अदा की जा रही है, जहाँ बड़ी संख्या में लोग एकत्र होकर मुल्क में अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांग रहे हैं.
सहरी से इफ्तार तक का सफर
रमजान के दौरान दिनचर्या अलसुबह करीब 3 बजे सहरी के साथ शुरू होती है. सहरी के बाद फजर की नमाज अदा की जाती है, जिसके बाद कुरान की तिलावत, दरूद, तस्बीह और नफ्ल नमाज पढ़ने का सिलसिला जारी रहता है. दिनभर के संयम के बाद शाम करीब 6:30 बजे (सूर्यास्त के अनुसार) रोजेदार इफ्तार के साथ अपना रोजा खोलते हैं. स्थानीय धर्मगुरु मौलाना असगर के अनुसार, रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम और आत्मशुद्धि का वह माध्यम है जो इंसान को सही रास्ते पर चलना सिखाता है.
आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व
मौलाना असगर ने बताया कि रोजा रखने के आध्यात्मिक लाभ के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी इसके सकारात्मक प्रभाव हैं. यह शरीर की शुद्धि (Detoxification) करता है और कई शारीरिक विकारों को दूर करता है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि रमजान साल के बारह महीनों में सबसे पाक महीना है, जिसमें की गई नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है. असली रोजा वही है जो इंसान की आंख, कान, हाथ और जुबान को गुनाहों से बचाए और उसे एक बेहतर इंसान बनाए.
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Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें
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