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Ayurvedic Plant Cultivation Benefits: छपरा की महिलाएं अब खेती-किसानी में भी कुछ अलग कर रही हैं. वे सिर्फ साग-सब्जी ही नहीं उगा रही हैं, बल्कि अब आयुर्वेदिक पेड़-पौधे और जड़ी-बूटी भी उगा रही हैं. इससे एक तरफ कमाई हो रही है, तो दूसरी तरफ इन्हीं औषधीय पौधों से कई तरह की बीमारियों का इलाज भी किया जा रहा है. ऐसे आयुर्वेदिक पौधों की खेती में खर्च भी काफी कम आता है. बड़े पैमाने पर इसकी खेती कर अच्छी कमाई की जा सकती है और साथ ही चेहरे, बाल सहित शरीर के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली कई बीमारियों से भी राहत मिलती है.
जिले के मांझी प्रखंड अंतर्गत बरेजा गांव निवासी दीपा कुमारी एलोवेरा लगाकर उससे कई बीमारियों को ठीक कर रही हैं. साथ ही वे किसानों को इससे कमाई करने का संदेश भी दे रही हैं. वे कम खर्च में एलोवेरा उगाने का तरीका भी बता रही हैं. यही नहीं, छत के गमले और बालकनी में एलोवेरा लगाकर इससे लाभ लेने का खास आइडिया भी दीपा कुमारी दे रही हैं.

कम खर्च में एलोवेरा की खेती आसानी से की जा सकती है. इसे लगाने के बाद 15 से 25 दिन के भीतर तैयार गोबर की खाद डालनी होती है. खेती करने से पहले इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि एलोवेरा न ज्यादा धूप में और न ही ज्यादा ठंड में अच्छी तरह बढ़ता है.

जहां हल्की धूप आती हो और मौसम ज्यादा ठंडा न हो, उसी जगह पर इसकी खेती सफल रहती है. लोकल 18 से बातचीत में दीपा कुमारी ने बताया कि एलोवेरा की खेती से किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं.
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इसकी खेती में खर्च काफी कम आता है. लगाने के बाद सिर्फ तैयार गोबर की खाद डालनी पड़ती है और समय-समय पर पानी देना जरूरी होता है. तुलनात्मक कम मेहनत और कम खर्च में इस फसल से अच्छी पैदावार ली जा सकती है.

एलोवेरा का उपयोग चेहरे के दाग मिटाने, बालों का रूखापन खत्म करने और चेहरे में ग्लो लाने में अहम भूमिका निभाता है. यही नहीं, इसके सेवन से शुगर जैसी गंभीर बीमारी में भी फायदा मिलता है. इसे बेचने पर बाजार में अच्छा दाम भी मिलता है और इसे घर के गमले में भी आसानी से लगाया जा सकता है. कुल मिलाकर यह फसल फायदे का सौदा है.
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